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Silver price forecast 2026 : चांदी में निवेश मौका जरूर है, लेकिन बिना रणनीति और जोखिम प्रबंधन के निवेश रिस्की हो सकता है. (AI Image)
Silver 50% Surge Explained : पिछले डेढ़ महीने में चांदी (Silver) ने जो रफ्तार दिखाई है, उसने निवेशकों को चौंका दिया है. इस दौरान MCX पर चांदी करीब 50% तक उछल चुकी है, और सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक तेज रैली है या इसके पीछे कोई गहरी वजह छिपी है? हकीकत यह है कि यह उछाल अफवाहों या सट्टेबाजी का नतीजा नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर चांदी की भूमिका में आए बड़े बदलाव का संकेत है. फिलहाल इस सुपर रैली के बाद निवेशकों को चांदी में क्या करना चाहिए. 2026 में चांदी का क्या भविष्य (Silver Outlook) दिख रहा है.
चांदी की भूमिका में बड़ा बदलाव
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि कई सालों तक चांदी को या तो गहनों के लिस मेटल माना गया या फिर ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला मेटल. लेकिन अब यह सोच बदल चुकी है. आज चांदी रणनीतिक इंडस्ट्रियल मेटल बन चुकी है. रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिफिकेशन, डिजिटल इकॉनमी और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों ने चांदी को उत्पादन के लिए अनिवार्य बना दिया है. यही वजह है कि इसकी मांग अब अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी बनती जा रही है.
इंडस्ट्रियल डिमांड क्यों है इतनी मजबूत
चांदी की सबसे बड़ी ताकत है इसकी बेहतरीन इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, जो इसे सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स, पावर ग्रिड और डिफेंस सिस्टम्स में बेहद जरूरी बनाती है. इन क्षेत्रों में कीमत से ज्यादा भरोसे और प्रदर्शन को अहमियत दी जाती है. इसका मतलब यह है कि दाम बढ़ने के बावजूद कंपनियां चांदी खरीदना बंद नहीं कर सकतीं. इसी वजह से चांदी की मांग अब प्राइस इनेलास्टिक हो गई है और गिरावट पर तुरंत सपोर्ट देखने को मिलता है.
यह रैली, पिछली रैलियों से क्यों अलग
अजय केडिया का कहना है कि लंबे समय तक चांदी की कीमतें फ्यूचर्स और पेपर ट्रेडिंग से तय होती रहीं. लेकिन जैसे ही ग्लोबल स्तर पर दाम संवेदनशील स्तरों तक पहुंचे, फिजिकल उपलब्धता का सवाल खड़ा हो गया. सप्लाई टाइट हुई, सेलर्स पीछे हटे और खरीदार मजबूर होकर ऊंचे दाम पर खरीदने लगे. नतीजा तेज सिंगल-डे मूव्स और लगातार ऊंची क्लोजिंग, जो यह दिखाते हैं कि बाजार अब राय नहीं, बल्कि हकीकत के आधार पर कीमत तय कर रहा है.
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2026 आगे का रास्ता : मौका भी, जोखिम भी
अजय केडिया का कहना है कि आगे चलकर चांदी में संभावनाएं बनी हुई हैं. अगर इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई की कमी बनी रहती है, तो अगले 1-2 साल में 90-100 डॉलर प्रति औंस की ओर बढ़त संभव है. लेकिन इतिहास यह भी बताता है कि चांदी बेहद अस्थिर (वोलेटाइल) कमोडिटी है. 1980 और 2011 की तरह तेज रैली के बाद गहरी गिरावट भी आ सकती है. लंबे समय में 40 डॉलर प्रति औंस एक अहम सपोर्ट जोन माना जाता है. इसलिए चांदी में निवेश मौका जरूर है, लेकिन बिना रणनीति और जोखिम प्रबंधन के निवेश रिस्की हो सकता है.
(Note : यहां जानकारी एक्सपर्ट से बात चीत के आधार पर दी गई है. यह फाइनेंशियल एक्सप्रेस के निजी विचार नहीं हैं. बाजार की स्थितियां बदल सकती हैं. बाजार में जोखिम को देखते हुए निवेश के पहले एक्सपर्ट की सलाह लें.)
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