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EPFO की रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 में 25% से ज्यादा क्लेम (विथड्रॉल, ट्रांसफर, इंश्योरेंस) रिजेक्ट हुए. (AI Image: Perplexity)
Common EPF Transfer Problems and How to Solve Them: आजकल बेहतर करियर और सैलरी के लिए लोग बार-बार नौकरी बदलते हैं. लेकिन अक्सर इस बदलाव के साथ एक और बड़ी चुनौती सामने आती है - एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड यानी ईपीएफ (EPF) का ट्रांसफर. जिस फंड को कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई से सालों तक जोड़ते हैं, उसी तक पहुंचने में उन्हें लालफीताशाही, तकनीकी गड़बड़ियों और कागजी प्रक्रियाओं की वजह से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
EPF की खूबी यह है कि यह न सिर्फ जबरन बचत कराता है बल्कि आकर्षक ब्याज और टैक्स छूट जैसी सुविधाओं के साथ रिटायरमेंट के लिए मजबूत सुरक्षा कवच भी देता है. भारत में करोड़ों कर्मचारी और उनकी फैमिली भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड यानी ईपीएफ (EPF) को एक भरोसेमंद विकल्प मानते हैं. मंथली सैलरी से 12% राशि की अनिवार्य कटौती, सालाना 8.25% का ब्याज, सरकार की गारंटी और टैक्स छूट, ये सब इसे एक मजबूत रिटायरमेंट टूल बनाते हैं. लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कर्मचारी नौकरी बदलते हैं और फंड ट्रांसफर करना चाहते हैं. EPFO के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में दर्ज कुल दावों में से लगभग 25% या तो रिजेक्ट कर दिए गए या अधर में लटके रहे. इनमें ट्रांसफर से जुड़ी शिकायतें सबसे ज्यादा थीं.
उदाहरण के लिए नोएडा के अवनीश (बदला हुआ नाम) को भी इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ी. उनकी ट्रांसफर रिक्वेस्ट महीनों तक पेंडिंग विद फील्ड ऑफिस (pending with field Office) के स्टेटस पर अटकी रही. जांच में पता चला कि पुराने एम्प्लॉयर ने गलती से EPS कॉन्ट्रिब्यूशन कटवाया, जबकि 2014 के बाद 15,000 रुपये से ज्यादा बेसिक सैलरी वालों के लिए EPS लागू ही नहीं होता. इस गलती को सुधारने में कई महीने लग गए.
इसी तरह, चेन्नई के रोहित (बदला हुआ नाम) का PF ट्रांसफर सिस्टम में ‘कंप्लिटेड (completed) दिखा, लेकिन पैसा नए अकाउंट में कभी नहीं पहुंचा. असल में PF ऑफिस ने आंतरिक रूप से ट्रांसफर रिजेक्ट कर दिया था. उन्हें कई स्तर की शिकायतें और दस्तावेज जुटाने पड़े, तब जाकर रकम फिर से क्रेडिट हुई.
दिक्कतें क्यों आती हैं?
EPF ट्रांसफर में दिक्कतें अक्सर एम्प्लॉयर या तकनीकी गलतियों की वजह से आती हैं. कई बार पुराने एम्प्लॉयर की चूक से रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो जाती है, तो कभी कर्मचारी के डेटा में गड़बड़ियां जैसे नाम की स्पेलिंग, जन्मतिथि या आधार नंबर का मिचमैच, समस्या खड़ी कर देते हैं. नया एम्प्लॉयर गलती से अलग UAN बना दे तो मामला और पेचीदा हो जाता है. इसके अलावा, पुराने एम्प्लॉयर द्वारा एग्जिट डेट अपडेट न करना या अधूरा KYC भी बड़ी अड़चनें बन जाते हैं.
- नाम, जन्मतिथि, आधार में मिसमैचिंग,
- एक से ज्यादा UAN बनना
- पुराने एम्प्लॉयर का समय पर एग्जिट डिटेल न भरना
- अधूरी KYC
- बैंक अकाउंट लिंकिंग की गड़बड़ी
इन छोटी-सी चूकों से पूरी प्रक्रिया दिक्कतें आ सकती हैं.
कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बाद EPF ट्रांसफर कराना जरूरी है. मौजूदा समय में वे घर बैठे ऑनलाइन यह काम निपटा सकते हैं. ईपीएफओ की ओर से EPF ट्रांसफर करने के लिए तरीके यहां देख सकते हैं.
ऑनलाइन ईपीएफ ट्रांसफर कैसे करें
स्टेप 1
'Unified Member Portal' पर जाएं और यूएनएन और पासवर्ड से लॉग-इन करें.
स्टेप 2
'Online Services' पर जाएं और 'One Member – One EPF Account (Transfer Request)' पर क्लिक करें.
स्टेप 3
वर्तमान रोजगार से संबंधित 'Personal Information' और 'PF Account' को वेरिफाई करें.
स्टेप 4
'Get Details' पर क्लिक करें, आपकी पिछले रोजगार के अकाउंट की विवरण राशि दिखा देगा.
स्टेप 5
फॉर्म के अनुसार अगले एम्प्लॉयर या मौजूदा एम्प्लॉयर में से किसी एक को चुनें.
स्टेप 6
यूएनएफआई सर्विफाइड (UNFI Certified) मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त करने के लिए 'Get OTP' पर क्लिक करें. 'OTP' दर्ज करें और 'Submit' पर क्लिक करें.
यूनिफाइड मेंबर पोर्टल : https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/memberinterface/"
इन बातों का रखें ध्यान
- सैलरी स्लिप्स हमेशा संभाल कर रखें, क्योंकि ये सर्विस और EPS पात्रता साबित करने का सबूत हैं.
- EPFO पोर्टल पर नियमित रूप से सर्विस हिस्ट्री चेक करें.
- नौकरी छोड़ने के 6 महीने के भीतर ट्रांसफर इनिशिएट करें.
- ट्रांसफर से पहले सुनिश्चित करें कि डेट ऑफ एग्जिट (Date of Exit) दर्ज हो चुकी है.
- Annexure K लेकर नए PF ऑफिस में जमा कराएं.
Annexure K लेना और सैलरी स्लिप्स संभालकर रखना बेहद जरूरी है. इससे प्रक्रिया तेज हो सकती है. श्रम मंत्रालय ने EPFO 3.0 के तहत छोटे क्लेम के ऑटो-सेटलमेंट, ATM-UPI बेस्ड विदड्रॉल और OTP-बेस्ड अपडेट जैसी सुविधाएं शुरू करने की घोषणा की है. हालांकि, फिलहाल इनका पूरा असर दिखना बाकी है. कर्मचारियों को चाहिए कि वे अपनी सर्विस हिस्ट्री और EPF खाते की जानकारी नियमित रूप से चेक करते रहें, ताकि नौकरी बदलने के बाद उनका मेहनत का पैसा किसी तकनीकी खामी या कागजी झंझट में फंस न जाए.
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