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अगर किसी बैंक अकाउंट में 3 से 12 महीने तक कोई भी लेन-देन नहीं होता, तो बैंक उसे इनएक्टिव मान लेता है. वहीं, जब अकाउंट में करीब 1 से 2 साल तक बिल्कुल एक्टिविटी नहीं होती, तो बैंक उसे डॉर्मेंट घोषित कर देता है. (AI Image: Gemini)
Is Your Bank Account इनएक्टिव or डॉर्मेन्ट? रोजमर्रा की भागदौड़ में हम में से कई लोग ऐसे बैंक अकाउंट भी रखे होते हैं जिनमें महीनों तक एक भी ट्रांजैक्शन नहीं होता. चाहे वह सैलरी अकाउंट हो, सेविंग्स अकाउंट हो या ऑनलाइन पेमेंट्स के लिए बनाया गया कोई पुराना खाता, लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर ऐसे खाते चुपचाप इनएक्टिव या डॉर्मेंट की कैटेगरी में चले जाते हैं.
समस्या तब सामने आती है जब अचानक ATM पैसा देना बंद कर दे, UPI पेमेंट फेल होने लगें, नेट बैंकिंग काम न करे या चेक क्लियर न हो और खाते के ओनर को पता भी न हो कि उनका बैंक अकाउंट डॉर्मेंट हो चुका है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि इनएक्टिव और डॉर्मेंट अकाउंट में अंतर क्या है, ये कब बनते हैं और इन्हें दोबारा एक्टिव कैसे कराया जाता है.
अगर आपके भी कई बैंक अकाउंट हैं और उनमें से कुछ में लंबे समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है, तो संभव है कि वे इनएक्टिव या डॉर्मेंट हो चुके हों. अपने अकाउंट्स का मौजूदा स्टेटस, कारण और समाधान की पूरी डिटेल यहां पढ़ें.
इनएक्टिव और डॉर्मेंट अकाउंट क्या होते हैं?
Inactive Account : इनएक्टिव अकाउंट
अगर किसी बैंक अकाउंट में 3 से 12 महीने तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो बैंक उसे इनएक्टिव मान लेता है.
इसमें आपको ज़्यादा दिक्कत नहीं आती—बस बैंक नोटिस भेज सकता है.
Dormant Account : डॉर्मेंट अकाउंट
जब अकाउंट में 12 महीने से अधिक (आमतौर पर 1–2 साल) तक कोई गतिविधि नहीं होती, तो वह डॉर्मेंट हो जाता है. इस स्थिति में कई बैंक सुविधाएँ बंद हो जाती हैं.
इनएक्टिव और डार्मेन्ट अकाउंट के बीच अंत
| फीचर | इनएक्टिव अकाउंट | डॉर्मेंट अकाउंट |
| मायने | कुछ समय से कोई ट्रांजैक्शन नहीं | लंबे समय से कोई एक्टविटी नहीं |
| अवधि | 3–12 महीने | 1–2 साल से अधिक |
| कब एक्टिव होगा | एक छोटा सा ट्रांजैक्शन करते ही | बैंक में जाकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है |
| असर | न्यूनतम प्रभाव | अकाउंट से ट्रांजेक्शन पर रोक या प्रतिबंध लग सकता है |
| बैंक अलर्ट | बहुत कम | कॉल या मोबाइल पर SMS के जरिए सूचना भेजी जा सकती है |
| Credit : ICICI Bank | ||
कब बैंक अकाउंट इनएक्टिव होता है?
अगर 3 से 12 महीनों तक अकाउंट में
- कोई पैसे जमा/निकासी नहीं
- कोई नेट बैंकिंग/UPI उपयोग नहीं
- कोई ATM ट्रांजैक्शन नहीं होता
- तब बैंक इसे इनएक्टिव घोषित कर देता है.
कब बैंक अकाउंट डॉर्मेंट होता है?
- यदि अकाउंट 12 महीने से ज्यादा इनएक्टिव है
- 24 महीने या उससे अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं
तब अकाउंट डॉर्मेन्ट हो जाता है.
इनएक्टिव बैंक अकाउंट का ग्राहकों पर क्या पड़ता है असर
कोई बड़ा प्रभाव नहीं
ATM, नेटबैंकिंग काम करता है
बस ट्रांजैक्शन नहीं होने पर बैंक नोट डाल सकता है
डॉर्मेंट अकाउंट में कौन-कौन सी बैंक सेवाएं बंद हो सकती हैं?
डॉर्मेंट अकाउंट के कारण बैंक कई सेवाएँ रोक देता है:
- ATM/डेबिट कार्ड बंद हो सकता है
- नेट बैंकिंग/UPI निष्क्रिय
- चेक बुक से भुगतान नहीं
- ऑटो डिडक्शन/EMI/प्रिमियम कटना बंद
- अकाउंट ट्रांजैक्शन पर रोक
- बैंक आपकी पहचान पुष्टि होने तक पैसे ट्रांसफर नहीं करेगा
यानी डॉर्मेंट स्टेटस आपकी बैंकिंग गतिविधियाँ सीमित कर देता है.
इनएक्टिव और डॉर्मेन्ट अकाउंट फिर से कैसे करें एक्टिव?
इनएक्टिव अकाउंट को एक्टिव करने की प्रक्रिया
सबसे आसान तरीका यही है कि आप अपने खाते में कोई भी छोटी सी ट्रांजैक्शन कर दें जैसे डिपॉज़िट, विदड्रॉल, UPI पेमेंट, चेक क्लियरिंग या फिर ATM से पैसे निकालना. इतना करते ही आपका अकाउंट तुरंत सक्रिय हो जाएगा.
डार्मेंट अकाउंट को फिर से ऐसे करें एक्टिव
डॉर्मेंट अकाउंट को एक्टिव करने के लिए बैंक थोड़ी औपचारिक प्रक्रिया पूरी करवाता है.
- अपनी बैंक शाखा पर जाएं
- एक रि-एक्टिवेशन फार्म (Reactivation Form) भरें
- आधार, पैन, पते से जुड़ा प्रमाण के साथ अपनी KYC जमा करें
- इसके बाद बैंक आपकी पहचान वेरीफाई करेगा
- फिर एक मामूली सा ट्रांजैक्शन मिसाल के लिए 10 या 100 रुपये का लेनदेन करवाया जाएगा
कुछ बैंक अपने ग्राहकों को मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, ईमेल और कस्टमर केयर के जरिए भी डार्मेंट अकाउंट फिर से एक्टिव करने की सुविधा देते हैं, लेकिन KYC के लिए ब्रांच जाना ही पड़ता है. यह औपरिकताएं पूरी करने के कुछ ही दिन बाद आपका अकाउंट फिर से एक्टिव हो जाता है.
अकाउंट लंबे समय तक न चलाने के खतरे
- ब्याज मिलना बंद हो सकता है
- बैंक चार्जेज जमा हो सकते हैं
- ATM/UPI ब्लॉक
- फ्रॉड का खतरा ज्यादा
- 10 साल से यूज न हुआ पैसा RBI के “अनक्लेम्ड फंड (Unclaimed Funds) में चला जाता है
अगर पैसा RBI में चला गया हो तो?
अगर आपका पैसा RBI में ट्रांसफर हो गया है तो चिंता की बात नहीं, आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है. सबसे पहले अपना अकाउंट दोबारा एक्टिव कराएँ, फिर बैंक में क्लेम आवेदन जमा करें. बैंक आपके दस्तावेज RBI को भेजता है और जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस आपके अकाउंट में जमा कर दिया जाता है. यह प्रक्रिया थोड़ा समय ले सकती है.
इनएक्टिव या डॉर्मेन्ट होने से कैसे बचें?
- हर 3–4 महीने में एक छोटा-सा ट्रांजैक्शन जरूर करें
- UPI, ATM या किसी डिजिटल माध्यम से लेन-देन करते रहें
- KYC अपडेट रखते रहें
कुल मिलाकर, बैंक अकाउंट को नियमित तौर पर इस्तेमाल करते रहना बेहद जरूरी है. छोटा-सा ट्रांजैक्शन भी आपके अकाउंट को सुरक्षित, एक्टिव और पूरी तरह उपयोगी बनाए रखता है. नहीं तो अचानक ATM, UPI या बैंकिंग सुविधाएं बंद होकर परेशानी बढ़ा सकती हैं.
(Credit : ICICI Bank)
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