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UP Property Registration New Rules : यूपी में टाइटल आधारित रजिस्ट्री लागू होने से प्रॉपर्टी खरीदना होगा सुरक्षित. (Image : Pixabay)
UP Property Registration New Rules Title-Based Registry Explained : यूपी सरकार (Uttar Pradesh Government) अब प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के पुराने तरीके को बदलने जा रही है. जल्द ही राज्य में दस्तावेज़ आधारित रजिस्ट्री की जगह टाइटल आधारित रजिस्ट्री लागू करने की तैयारी है. इसका मतलब यह होगा कि किसी भी प्रॉपर्टी की बिक्री से पहले सरकार खुद यह जांच करेगी कि बेचने वाला व्यक्ति वास्तव में उस जमीन या संपत्ति का मालिक है या नहीं. इससे धोखाधड़ी के मामले कम होंगे और खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पहले से ज्यादा सुरक्षित बन जाएगी.
दस्तावेज आधारित रजिस्ट्रेशन में क्या है कमी
अब तक यूपी में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पूरी तरह दस्तावेज़ों पर आधारित था. यानी रजिस्ट्री सिर्फ यह साबित करती थी कि एक लेन-देन हुआ है, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं करती थी कि बेचने वाला व्यक्ति असली मालिक है या नहीं. इसी वजह से कई बार लोग नकली कागजात से दूसरे की जमीन बेच देते थे या एक ही जमीन की कई बार रजिस्ट्री हो जाती थी. अधिकारियों ने माना है कि इस खामी के कारण हजारों मुकदमे अदालतों में पहुंचे हैं, खासकर शहरों में जहां जमीन की कीमत ज्यादा है और रिकॉर्ड कई विभागों में बिखरे रहते हैं.
टाइटल आधारित रजिस्ट्री कैसे बदलेगी तस्वीर
टाइटल आधारित रजिस्ट्रेशन में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब बिक्री से पहले सरकार खुद यह जांचेगी कि विक्रेता के पास प्रॉपर्टी का वैध मालिकाना हक है या नहीं. इसके लिए राजस्व विभाग, नगर निगम और रजिस्ट्री विभाग के रिकॉर्ड आपस में जोड़े जाएंगे ताकि सब-रजिस्ट्रार तुरंत यह देख सकें कि जमीन या मकान का असली मालिक कौन है. इससे केवल वही रजिस्ट्री होगी जिसमें बेचने वाला व्यक्ति वास्तव में मालिक होगा.
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खरीदारों के लिए क्यों फायदेमंद है यह फैसला
नई व्यवस्था से घर या जमीन खरीदना पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा. अब खरीदार को सिर्फ कागजों पर भरोसा नहीं करना पड़ेगा, बल्कि सरकार की ओर से टाइटल की प्राथमिक जांच भी होगी. इससे फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी और दोहरी रजिस्ट्री के मामले बड़े पैमाने पर कम होंगे. साथ ही, मालिकाना हक साफ होने से कानूनी झंझट भी काफी घट जाएंगे. जो लोग पहली बार घर खरीदते हैं, उनके लिए यह कदम काफी राहत देने वाला साबित हो सकता है.
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क्या यह व्यवस्था पूरी सुरक्षा दे पाएगी
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि टाइटल आधारित रजिस्ट्री पूरी तरह से जोखिम खत्म नहीं करती. अगर कोई ऐसा कर्ज या विवाद हो जिसे रजिस्ट्रेशन कानून के तहत दर्ज कराना ज़रूरी नहीं है, तो उसकी जानकारी खरीदार को इस सिस्टम से नहीं मिल पाएगी. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी सौदे से पहले अपनी ओर से भी टाइटल की जांच करवाना हमेशा समझदारी होती है.
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर नई पहल
रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं, इसी के बाद टाइटल आधारित रजिस्ट्री का प्रस्ताव तैयार किया गया है. हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है और यूपी अब उसी मॉडल की ओर बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि इस कदम से प्रॉपर्टी विवादों में कमी आएगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी.
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