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Weak Rupees vs Dollar Impact on Students and Travler : रुपये में गिरावट से विदेश यात्रा और फॉरेन एजुकेशन का खर्च तेजी से बढ़ रहा है. (File Photo : Reuters)
Rupees vs Dollar Aaj ka Rate : डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी लगातार बनी हुई है. पिछले कुछ दिनों से एक डॉलर का भाव 89 रुपये को पार करके 90 रुपये की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है. बुधवार को दोपहर 12.50 बजे एक डॉलर का भाव 89.27 रुपये के आसपास चल रहा था. रुपये में यह गिरावट सिर्फ एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन भारतीय परिवारों के बजट पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है, जिनके बच्चे विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं या करने की योजना बना रहे हैं. साथ ही छुट्टियों में फॉरेन ट्रिप की प्लानिंग कर रहे लोगों की चिंता भी बढ़ रही है, क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपये की हर गिरावट उनके बजट को बिगाड़ रही है.
रुपये पर दबाव क्यों बढ़ रहा है
रुपये में हाल की गिरावट (Falling Rupee Value) कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फैक्टर्स की वजह से आ रही है. मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 4 पैसे टूटकर 89.20 पर बंद हुआ. इससे पहले शुक्रवार को तो डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 89.66 तक चला गया था. शेयर बाजार से कमजोर संकेत और विदेशी फंड की लगातार निकासी ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया. हालांकि कच्चे तेल के गिरते दाम ने थोड़ी राहत दी, लेकिन कुल मिलाकर विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में डॉलर की मांग ज्यादा बनी हुई है. रिजर्व बैंक ने भी माना है कि डॉलर की बढ़ती मांग रुपये की कमजोरी का बड़ा कारण है. अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर स्थिति साफ होती है, तो यह दबाव कुछ कम हो सकता है.
आगे का अनुमान
करंसी एक्सपर्ट और LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि डॉलर इंडेक्स जहां स्थिर है, वहीं नॉन-एग्री कमोडिटी के ऊंचे दाम और एफआईआई की लगातार बिकवाली रुपये को कमजोर बनाए हुए हैं. उनका मानना है कि इस हफ्ते आने वाले महत्वपूर्ण अमेरिकी आंकड़े - रिटेल सेल्स, कोर पीसीई, पीएमआई और जीडीपी - रुपये में और उतार-चढ़ाव ला सकते हैं. उनका अनुमान है कि इस हफ्ते रुपया 89.00 से 89.50 के दायरे में रह सकता है.
फॉरेन एजुकेशन का बिगड़ा बजट
विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और परिवारों पर रुपये की गिरावट का सीधा असर पड़ रहा है. एक साल पहले जब एक डॉलर 83 रुपये (Rupee Vs Us Dollar) के आसपास था, तब अगर किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी 30,000 डॉलर की फीस करीब 25 लाख रुपये पड़ती थी, तो वही फीस अब 27 लाख रुपये के करीब पहुंच रही है. वह भी यूनिवर्सिटी की तरफ से फीस में कोई इजाफा नहीं किए जाने के बावजूद.
यूके और कनाडा में रहने का हर खर्च, खाना, ट्रांसपोर्ट, स्टूडेंट हाउसिंग - सबकुछ पहले की तुलना में 8,000 से 18,000 रुपये महीने तक बढ़ चुका है. एक-दो पाउंड का बस किराया या 10 डॉलर का खाना अब जेब पर ज्यादा भारी महसूस हो रहा है.
इसी वजह से कई परिवार एडमिशन टाल रहे हैं, स्टडी लोन्स को रीवर्क कर रहे हैं या फिर जर्मनी, आयरलैंड और मलेशिया जैसे देशों पर गौर कर रहे हैं, जहां या तो पढ़ाई सस्ती है या रहने का खर्च कम पड़ता है.
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फॉरेन ट्रैवल के बजट पर भारी असर
कमजोर रुपये का असर छुट्टियां मनाने वालों पर भी साफ दिख रहा है. पहले यूरोप की ट्रिप पर प्रति व्यक्ति करीब 2.2 लाख रुपये खर्च होते थे, जो अब 2.6 लाख रुपये से भी ऊपर जा रहे हैं. होटल, अंदरूनी उड़ानें और रोजमर्रा के खर्च सब महंगे होते जा रहे हैं.
इस बदलाव ने भारतीय यात्रियों को अपने ट्रैवल प्लान पर फिर से विचार करने को मजबूर किया है. कई लोग अब थाईलैंड, वियतनाम, बाली और ओमान जैसे देशों का रुख कर रहे हैं, जहां रुपये की कीमत तुलनात्मक रूप से बेहतर रहने की उम्मीद है और कुल खर्च कम आता है. लोग अब पहले से प्लानिंग कर रहे हैं, एक्सचेंज रेट पर निगाह रख रहे हैं और अपनी ट्रैवल स्ट्रैटेजी को लेकर और सतर्क हो गए हैं.
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