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एक गलत क्लिक और बैंक खाता खाली! चालान के नाम पर होने वाले डिजिटल फ्रॉड से बचें और केवल आधिकारिक परिवहन पोर्टल पर ही भुगतान करें. Photograph: (AI generated)
डिजिटल धोखाधड़ी के मामले इधर लगातार सामने आ रहे हैं. हाल ही हुई एक ऐसी घटना में एक व्यक्ति को लगभग 6 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. यह व्यक्ति अपने वाहन पर कथित ट्रैफिक चालान को लेकर आए एक एसएमएस के झांसे में आ गया. इसके बाद साइबर ठगों ने उसके खाते से करीब 6,900 यूरो यानी लगभग 6 लाख रुपये निकल लिए. इस मामले में साइबर क्राइम (Cyber Crime) पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि वाहन मालिकों को निशाना बनाकर फर्जी चालान संदेशों के जरिए साइबर ठगी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है.
तेलंगाना टुडे में पहली बार रिपोर्ट हुए इस मामले ने दिखाया है कि साइबर ठग किस तरह नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई ठग रहे हैं.
घोटाला कैसे हुआ
यह घोटाला तब सामने आया जब पीड़ित को एक टेक्स्ट मैसेज मिला, जिसमें उसके वाहन पर ट्रैफिक नियम उल्लंघन का जुर्माना लगने का दावा किया गया था और साथ ही भुगतान के लिए एक लिंक दिया गया था. मैसेज को सही मानकर उसने उस लिंक पर क्लिक किया. यह लिंक उसे एक फर्जी वेबपेज पर ले गया, जो देखने में बिल्कुल आधिकारिक चालान भुगतान पोर्टल जैसा था. जैसे ही उसने भुगतान से जुड़ी जानकारी दर्ज करने की कोशिश की, जालसाजों ने उसके मोबाइल फोन और बैंकिंग जानकारी तक रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया. इसके बाद उन्होंने बिना अनुमति उसके खाते से कई ट्रांजैक्शन कर डाले.
साइबर अपराध अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की धोखाधड़ी में अक्सर फर्जी वेबसाइटों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें असली सरकारी पोर्टल जैसा दिखने के लिए डिजाइन किया जाता है. ये खतरनाक लिंक पीड़ित के मोबाइल या कंप्यूटर में हानिकारक सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल कर सकते हैं, जिससे अपराधियों को डिवाइस पर पूरा नियंत्रण मिल जाता है और वे बैंकिंग व अन्य संवेदनशील फाइनेंसियल ऐप्स तक आसानी से पहुंच बना लेते हैं.
ट्रैफिक चालान घोटालों से सुरक्षित रहने के लिए पुलिस की सलाह
इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों को बढ़ते साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
लिंक पर क्लिक करने से बचें
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे ट्रैफिक जुर्माना भरने के लिए SMS, ई-मेल या व्हाट्सऐप पर आने वाले किसी भी लिंक पर भरोसा न करें और न ही उन्हें खोलें. पुलिस ने साफ कहा है कि ट्रैफिक विभाग कभी भी चालान भुगतान के लिए सीधे लिंक नहीं भेजता.
आधिकारिक पोर्टल पर ही जांच करें
वाहन मालिकों को किसी भी लंबित चालान की जानकारी केवल अधिकृत सरकारी वेबसाइटों पर ही देखनी चाहिए, जैसे परिवहन पोर्टल (parivahan.gov.in) या संबंधित राज्य की ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट. चालान जांचते समय हमेशा अपना वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर खुद टाइप करें, न कि किसी दिए गए लिंक का इस्तेमाल करें.
मैसेज की अच्छी तरह जांच करें
मैसेज भेजने वाले की जानकारी ध्यान से देखें और अनजान नंबरों से आए अलर्ट को नजरअंदाज करें. जिन संदेशों में स्पेलिंग मिस्टेक्स हों या जानकारी अस्पष्ट और अधूरी हो, उनसे सतर्क रहें क्योंकि ये धोखाधड़ी के स्पष्ट संकेत होते हैं.
फाइनेंसियल डिटेल्स सुरक्षित रखें
कभी भी अनजान या संदिग्ध वेबसाइटों पर अपने कार्ड की जानकारी, पिन या ओटीपी दर्ज न करें. किसी भी अनजान लिंक के जरिए ऐप डाउनलोड करने से बचें और ट्रैफिक से जुड़े ऐप्स केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें.
संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करें
अगर आपको कोई संदिग्ध मैसेज मिलता है, तो उसकी तुरंत रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर करें या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें.
डिवाइस की सुरक्षा बढ़ाएं
अपने मोबाइल फोन का सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें और सभी जरूरी खातों में टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर सक्रिय करें.
साइबर अपराध अधिकारियों ने एक अहम चेतावनी दोहराई है. उनका कहना है कि पुलिस या परिवहन विभाग कभी भी SMS के जरिए तुरंत भुगतान की मांग नहीं करता. किसी भी जानकारी पर कार्रवाई करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें और केवल आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
To read this article in English, click here.
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