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DoT ने कंपनियों को आगे निर्देश दिया है कि ऐप को प्रारंभिक सेटअप प्रक्रिया के दौरान यूज़र्स के लिए स्पष्ट रूप से दिखाई देने योग्य बनाया जाए.
Sanchar Saathi App:टेलीकॉम विभाग (DoT) ने एक निर्देश जारी किया है जिसके तहत देश में बेचे जाने वाले सभी नए मोबाइल उपकरणों में उसके फ्रॉड-रिपोर्टिंग ऐप संचार साथी को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करना होगा. इस निर्णय का हैंडसेट निर्माताओं द्वारा विरोध किया जाना तय माना जा रहा है. यह अनिवार्यता अगले 90 दिनों के भीतर लागू होगी और देश में निर्मित तथा आयातित दोनों प्रकार के फोन पर लागू होगी. यह पहली बार है जब सरकार ने पूरे हैंडसेट इकोसिस्टम में किसी विशेष उपभोक्ता ऐप की एक जैसी, अनिवार्य बंडलिंग का आदेश दिया है.
लगभग सभी प्रमुख स्मार्टफोन ब्रांड जैसे Apple, Samsung, Google, Vivo, Oppo और Xiaomi , भारत में अपने डिवाइस का निर्माण करते हैं. ऐसे में यह अनिवार्यता व्यापक ऑपरेशनल इम्प्लिकेशन्स डालने वाली है.
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उद्योग प्रतिनिधियों ने क्या कहा?
फाइनेंसियल एक्सप्रेस से बात करने वाले हैंडसेट निर्माताओं ने कहा कि यह अनिवार्यता ऐसे उद्योग पर अनावश्यक बोझ डालती है जो पहले से ही अनुपालन दबाव, बढ़ती कंपोनेंट लागत और मुनाफे से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है.
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि निर्माताओं को सरकार समर्थित ऐप को प्री-इंस्टॉल करने के लिए मजबूर करना उन्हें ऐसे नीति-कार्यान्वयन एजेंटों में बदल देता है, जिन मुद्दों को यूजर-केंद्रित जागरूकता कार्यक्रमों के ज़रिए भी संबोधित किया जा सकता था.
कई अधिकारियों ने कहा कि उपभोक्ता की पसंद से समझौता नहीं होना चाहिए और ऐप में भरोसा स्वाभाविक रूप से जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के माध्यम से विकसित होना चाहिए, न कि इसे अनिवार्य रूप से डिवाइस में एम्बेड करके.
DoT का आदेश क्या कहता है?
28 नवंबर के आदेश के अनुसार, हर निर्माता और आयातक को अपने फोन संचार साथी ऐप के साथ ही बेचना होगा, और इसे बंद करने या इसकी कार्यक्षमता को सीमित करने का विकल्प नहीं दिया जाएगा. DoT ने कंपनियों को यह भी निर्देश दिया है कि ऐप को प्रारंभिक सेटअप प्रक्रिया के दौरान यूज़र्स के लिए स्पष्ट रूप से दिखाई देने योग्य बनाया जाए. जो लाखों डिवाइस पहले से ही बने हुए हैं और वितरण श्रृंखला में हैं, उनके लिए विभाग ने निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे सॉफ़्टवेयर अपडेट के माध्यम से ऐप को बाद में जोड़ें.
फोन बनाने वाली कंपनियों को इस आदेश के पालन की पुष्टि करते हुए 120 दिनों के भीतर रिपोर्ट जमा करनी होगी. आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि नियमों का पालन न करने पर क्या कार्रवाई होगी, जिसमें टेलीकम्युनिकशन्स एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स 2024 और अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई शामिल है.
संचार साथी क्या है?
सरकार के अनुसार, संचार साथी ऐप एक उपभोक्ता सुरक्षा उपकरण के रूप में कार्य करता है. यह यूज़र्स को IMEI नंबर की प्रामाणिकता जांचने, संदिग्ध SIM या डिवाइस दुरुपयोग की पहचान करने और खोए या चोरी हुए हैंडसेट की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है. 15 अंकों वाले अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (IMEI) नंबर के साथ छेड़छाड़ करना गैर-जमानती अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों लग सकते हैं.
यूज़र्स ऐप के जरिए धोखाधड़ी वाले कॉल और ऑनलाइन ठगी की रिपोर्ट कर सकते हैं. यह डेटा केंद्रीय ट्रैकिंग सिस्टम में जाता है, जिसे कानून प्रवर्तन अधिकारी इस्तेमाल करते हैं. ऐसा लगता है कि इस ऐप को सभी डिवाइसों में अनिवार्य रूप से डालने का उद्देश्य बढ़ते टेलीकॉम धोखाधड़ी और पहचान चोरी के मामलों पर कड़ी कार्रवाई करना है.
यह आदेश पिछले हफ्ते के उन निर्देशों के बाद आया है, जिनमें WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप आधारित कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म को यूज़र्स के सक्रिय SIM कार्ड से लगातार जुड़ा रहने के लिए कहा गया था. नए नियम के तहत इन ऐप्स के वेब वर्जन में यूज़र्स को हर छह घंटे में कम से कम एक बार अपने आप लॉग आउट होना होगा, और हर बार QR कोड के जरिए फिर से लॉगिन करना होगा. इन कंपनियों को भी DoT के साथ 120 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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