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TCS, ओला इलेक्ट्रिक और ज़ेप्टो सहित भारत की बड़ी टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स ने 2025 में बड़े पैमाने पर छंटनी की है.
जैसे-जैसे 2025 का अंत करीब आ रहा है, भारत का टेक क्षेत्र पिछले एक दशक के अपने सबसे उथल-पुथल भरे साल से बाहर निकल रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) द्वारा संचालित संरचनात्मक बदलाव, रियल-मनी गेमिंग पर ऐतिहासिक प्रतिबंध और मुनाफे के लिए बढ़ते दबाव ने पूरी इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर छंटनी की एक लहर पैदा कर दी है. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी पुरानी दिग्गज आईटी कंपनियों से लेकर ओला इलेक्ट्रिक और ड्रीम11 जैसे बड़े यूनिकॉर्न तक, इस इकोसिस्टम का कोई भी कोना इससे अछूता नहीं रहा है.
इंक42 (Inc42) के इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, केवल 2025 में ही भारत में लगभग 9,500 टेक प्रोफेशनल्स ने अपनी नौकरियां गँवाईं. विशेषज्ञ इस बदलाव को‘द ग्रेट एआई रियलइनमेंट’ कह रहे हैं.
टीसीएस और एआई स्किल्स गैप
साल की सबसे चौंकाने वाली घटनाओं में से एक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से सामने आई. आमतौर पर नौकरी की सुरक्षा के लिए पहचानी जाने वाली इस आईटी दिग्गज कंपनी ने कथित तौर पर अपने वर्कफोर्स में लगभग 2% की कटौती की. इसका असर 12,000 से अधिक कर्मचारियों पर पड़ेगा. यह छंटनी प्रक्रिया एक साथ नहीं होगी, बल्कि कई महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी और 2026 तक जारी रहने की संभावना है.
ये छंटनियां मुख्य रूप से मिड-टू-सीनियर लेवल टैलेंट पर केंद्रित रहीं, क्योंकि कंपनी एक AI-फर्स्ट डिलीवरी मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही है. विश्लेषकों के अनुसार, रूटीन कोडिंग और सपोर्ट से जुड़े पारंपरिक रोल्स को तेजी से खत्म किया जा रहा है, क्योंकि टीसीएस अपने बेंच मॉडल को ऑटोमेट करने के लिए GitHub Copilot जैसे टूल्स को इंटीग्रेट कर रही है.
टेक स्टार्टअप्स में छंटनी
2025 में स्टार्टअप इकोसिस्टम में ‘हर हाल में ग्रोथ’ की सोच से हटकर लीन और ऑटोमेटेड ऑपरेशंस की ओर स्पष्ट बदलाव देखने को मिला. साल के दौरान पूरे इकोसिस्टम में बड़ी छंटनियां इस तरह सामने आईं:
ओला इलेक्ट्रिक
छंटनी: 1,000+ कर्मचारी
आईपीओ के बाद बढ़ते घाटे पर काबू पाने और मार्जिन को बेहतर करने के लिए ईवी निर्माता ओला इलेक्ट्रिक ने एक हजार से अधिक पदों में कटौती की. ये छंटनियां मुख्य रूप से फ्रंट-एंड ऑपरेशंस और उन डिवीजनों में की गईं, जिन्हें अब तेजी से ऑटोमेटेड सिस्टम्स के जरिए मैनेज किया जा रहा है.
मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL)
छंटनी: 600+ कर्मचारी
“प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट” लागू होने के बाद, एमपीएल को अपने भारत स्थित वर्कफोर्स का लगभग 60% हिस्सा कम करना पड़ा. यह कदम कैश-आधारित गेमिंग से हटकर विज्ञापन-समर्थित (ad-supported) मॉडल की ओर मजबूरी में किए गए बदलाव को दर्शाता है.
गपशप (Gupshup)
छंटनी: 500 कर्मचारी
कन्वर्सेशनल एआई यूनिकॉर्न गपशप ने ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करने और मुनाफे पर फोकस बढ़ाने के लिए अपने कर्मचारियों की संख्या घटाई. यह कटौती खास तौर पर उन विभागों में की गई, जो हाल के समय में कंपनी द्वारा किए गए कई अधिग्रहणों के दौरान शामिल किए गए थे.
गेम्सक्राफ्ट (Gameskraft)
छंटनी: 400 कर्मचारी
रेगुलेटरी सख्ती का एक और शिकार बनी इस गेमिंग कंपनी ने बड़े स्तर पर पुनर्गठन किया. अपने मुख्य रियल-मनी गेमिंग (RMG) रेवेन्यू स्रोतों के लगभग खत्म होने के खतरे के बीच, कंपनी ने करीब 400 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया.
जेप्टो (Zepto)
छंटनी: 300 कर्मचारी
भले ही कंपनी ने हाई-प्रोफाइल फंडिंग राउंड्स जुटाए हों, लेकिन क्विक-कॉमर्स लीडर जेप्टो ने भी सैकड़ों कर्मचारियों को अपनी पेरोल से हटाया. इनमें से कई भूमिकाओं को थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्ट्स में शिफ्ट किया गया, जबकि इनवॉइस प्रोसेसिंग और रीप्लेनिशमेंट जैसे काम इन-हाउस सॉफ्टवेयर के जरिए ऑटोमेट कर दिए गए.
वर्से इनोवेशन (VerSe Innovation)
छंटनी: 350 कर्मचारी
डेलीहंट और जोश की पेरेंट कंपनी वर्से इनोवेशन ने फंडिंग की कमी के बीच नौकरियों में कटौती की. कंपनी के अनुसार, कंटेंट मॉडरेशन और क्यूरेशन के लिए एआई को इंटीग्रेट करने के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे कई भूमिकाएं अनावश्यक हो गईं.
ड्रीम11 का बड़ा झटका
अगस्त 2025 में “प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट” के पारित होने के साथ ही रियल-मनी गेमिंग (RMG) पर प्रभावी रूप से प्रतिबंध लग गया, जिससे लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन वाला यह सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ.
हालांकि ड्रीम11 के सीईओ हर्ष जैन ने 500 इंजीनियर्स को नई एआई और फिनटेक वेंचर्स में री-डिप्लॉय कर बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की मिसाल पेश की, लेकिन पूरा उद्योग इतना मजबूत साबित नहीं हुआ. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस प्रतिबंध के चलते गेमिंग से जुड़े सहायक इकोसिस्टम में करीब 2 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं.
अमेज़न इंडिया भी साल के शुरुआत में सीईओ एंडी जैसी द्वारा जारी किए गए वैश्विक पुनर्गठन आदेश से अछूता नहीं रहा. खुद को “दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप” की तरह संचालित करने के लक्ष्य के तहत, ई-कॉमर्स दिग्गज ने 2025 की अंतिम तिमाही में बेंगलुरु, हैदराबाद और गुरुग्राम स्थित अपने भारतीय हब्स में लगभग 1,000 कॉर्पोरेट पदों को समाप्त कर दिया.
सीनियर वीपी अमित अग्रवाल के अनुसार, ये कटौतियां केवल लागत घटाने के लिए नहीं थीं, बल्कि उन “संगठनात्मक परतों को हटाने” की रणनीतिक कोशिश थीं, जो महामारी के दौर में हुई हायरिंग के कारण जरूरत से ज्यादा बढ़ गई थीं. यह छंटनी मुख्य रूप से एचआर, मार्केटिंग और फाइनेंस जैसे व्हाइट-कॉलर रोल्स पर असर डालती है. कंपनी अब अपने संगठनात्मक ढांचे को फ्लैट बनाने और संसाधनों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा तेजी से बढ़ रहे क्विक-कॉमर्स वर्टिकल जैसे हाई-स्टेक दांवों में दोबारा लगाने पर फोकस कर रही है.
साइलेंट लेऑफ्स और भविष्य
इन सुर्खियों के अलावा, 2025 में ‘साइलेंट लेऑफ्स’ का चलन भी हावी रहा. माइक्रोसॉफ्ट (वैश्विक स्तर पर 9,000) और मेटा (भारत में 600) जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों समेत कई फर्मों ने सार्वजनिक रूप से छंटनी की घोषणा करने के बजाय कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू न करने और परफॉर्मेंस-लिंक्ड एग्ज़िट्स का रास्ता अपनाया.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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