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व्हाट्सएप इन्वेस्टमेंट का मायाजाल: फर्जी ऐप और IPO के नाम पर साइबर ठगों ने कच्छ के कर्मचारी से ₹16 लाख की बड़ी ठगी को अंजाम दिया. Photograph: (AI generated)
गुजरात के कच्छ जिले के भुज से ताल्लुक रखने वाले 42 वर्षीय एक निजी कंपनी कर्मचारी व्हाट्सऐप के जरिए किए गए एक सोफिस्टिकेटेड शेयर निवेश घोटाले का ताजा शिकार बने हैं. अजीतसिंह जडेजा ने स्थानीय साइबर अपराध पुलिस में तब शिकायत दर्ज की, जब उन्हें एहसास हुआ कि कई महीनों तक सुनियोजित तरीके से किए गए इस फर्जीवाड़े में उनसे 16 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई है. इस धोखाधड़ी में नकली ऐप्स, मुनाफे के फर्जी आंकड़े और बार-बार अतिरिक्त भुगतान की मांग जैसे हथकंडे इस्तेमाल किए गए.
यह मामला भारत में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल निवेश घोटालों की गंभीरता को उजागर करता है, जहां ठग व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भोले-भाले लोगों को निशाना बना रहे हैं. ये अपराधी शेयर बाजार या आईपीओ में जल्दी और ज्यादा रिटर्न का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं.
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व्हाट्सऐप स्टॉक निवेश घोटाला: कैसे हुआ खुलासा
यह घोटाला 21 अप्रैल 2025 को शुरू हुआ, जब अजीतसिंह जडेजा को एक अज्ञात नंबर से एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया. यह ग्रुप खुद को एक भरोसेमंद स्टॉक एडवाइजरी कम्युनिटी के रूप में पेश कर रहा था और नियमित रूप से बाजार से जुड़े टिप्स, विश्लेषण और कथित सफलता की कहानियां साझा करता था, ताकि धीरे-धीरे भरोसा बनाया जा सके. 4 जुलाई को उन्हें एक निजी संदेश मिला, जिसमें एक ऑनलाइन फॉर्म का लिंक भेजा गया था. इसके बाद उन्हें एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के निर्देश दिए गए, जो खुद को विशेष स्टॉक ट्रेडिंग और आईपीओ निवेश के अवसर उपलब्ध कराने वाला बता रहा था.
10 जुलाई से 21 अगस्त के बीच अजीतसिंह जडेजा ने ऐप और व्हाट्सऐप के जरिए साझा किए गए अलग-अलग बैंक खातों में कई किश्तों में कुल 16 लाख रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर की. उन्हें और ज्यादा फंसाने के लिए ठगों ने शुरुआत में मामूली मुनाफा दिखाया. उनकी 5,000 रुपये की निवेश राशि को 5,245 रुपये में बदलकर नकली ऐप में बेहद विश्वसनीय तरीके से प्रदर्शित किया गया.
इसके बाद जाल और कस गया, जब ऐप में कथित आईपीओ अलॉटमेंट के बाद जडेजा के खाते में झूठे तौर पर 18 लाख रुपये का लोन क्रेडिट दिखाया गया. जब उन्होंने अपनी कथित कमाई निकालने की कोशिश की, तो प्रक्रिया अटक गई. इसके बाद ठगों ने “प्रोसेसिंग फीस” या “टैक्स क्लीयरेंस” के नाम पर अतिरिक्त 9 लाख रुपये की मांग की. इस तरह की ठगी में यह एक आम तरीका है, जिसमें गायब होने से पहले पीड़ित से और पैसे ऐंठे जाते हैं.
धोखाधड़ी का एहसास होते ही जडेजा ने साइबर अपराध इकाई से संपर्क किया. फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.
व्हाट्सऐप निवेश धोखाधड़ी से कैसे रहें सुरक्षित
सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर निवेश से जुड़ी ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए, सरकारी एजेंसियां और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं.
ऐसे घोटालों के प्रमुख चेतावनी संकेतों में बिना आपकी अनुमति के किसी अनजान नंबर द्वारा इन्वेस्टमेंट ग्रुप में शामिल किया जाना, अनजान ऐप्स या लिंक भेजे जाना, बहुत अधिक और जल्दी रिटर्न की गारंटी देना, तथा मुनाफा निकालने के लिए पहले फीस या टैक्स के नाम पर पैसे मांगना शामिल है.
निवेश करने से पहले हमेशा संबंधित प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच आधिकारिक माध्यमों जैसे सेबी की पंजीकृत मध्यस्थों की सूची (intermediaries list) से करनी चाहिए. थोड़ी सी सावधानी और जानकारी ऐसे साइबर धोखाधड़ी से बचाव में अहम भूमिका निभा सकती है.
सुरक्षित रहने के लिए यहां कुछ व्यावहारिक उपाय दिए गए हैं जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है:
– व्हाट्सऐप पर भेजे गए अनजान लिंक या अनवेरिफाइड सोर्सेज से ऐप डाउनलोड करने से बचें.
– अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को इस तरह सेट करें कि कोई भी आपको बिना अनुमति ग्रुप में न जोड़ सके.
– व्हाट्सऐप पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन और ऐप लॉक जैसी सुरक्षा सुविधाएं एक्टिव रखें.
– कभी भी ओटीपी, बैंकिंग विवरण या व्यक्तिगत जानकारी अनजान लोगों के साथ साझा न करें.
– किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें.
जैसे-जैसे ठगों के तरीके और ज्यादा सोफिस्टिकेटेड होते जा रहे हैं, इन महंगे डिजिटल जालों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका अवेयरनेस और सतर्कता ही है.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
To read this article in English, click here.
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