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12-3-30 Workout: जानिए कैसे यह वर्कआउट वजन कम करने और तनाव घटने में मदद करता है

Benefits of 12-3-30 Workout : 12-3-30 वर्कआउट वजन घटाने, कार्डियोवस्कुलर स्टैमिना बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद करता है. यह जोड़ों के लिए सुरक्षित है और नियमित अभ्यास से शरीर और दिमाग दोनों को फायदा पहुंचाता है.

Benefits of 12-3-30 Workout : 12-3-30 वर्कआउट वजन घटाने, कार्डियोवस्कुलर स्टैमिना बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद करता है. यह जोड़ों के लिए सुरक्षित है और नियमित अभ्यास से शरीर और दिमाग दोनों को फायदा पहुंचाता है.

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FE Hindi Desk
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12-3-30 Workout: वजन कम करें और तनाव घटाएं. Photograph: (AI Generated)

Improve Health With 12-3-30 Workout: 12-3-30 वर्कआउट जिसमें ट्रेडमिल पर 12% ढलान पर 3 माइल प्रति घंटे की स्पीड से 30 मिनट चलना होता है, आजकल खूब चर्चा में है. माना जाता है कि इससे फैट जल्दी बर्न होता है और वजन घटाने में मदद मिलती है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये वर्कआउट सिर्फ वजन कम करने तक ही काम आता है, या फिर इससे स्टैमिना भी बढ़ता है? और क्या ये मेन्टल  हेल्थ को भी थोड़ा बहुत बूस्ट कर सकता है?

चलिये, इस का जवाब जानने के लिए एक्सपर्ट्स की राय लेते हैं.

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12-3-30 वर्कआउट फायदेमंद क्यों है?

12-3-30 वर्कआउट में लगातार मिड-इंटेंसिटी वाली मूवमेंट होती है. इससे शरीर जोड़ों पर ज़्यादा स्ट्रेस डाले बिना कुशलतापूर्वक फैट बर्न करता है. दिल्ली के CK बिरला हॉस्पिटल के फिजियोथेरेपी विभाग के हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट, डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह के मुताबिक, यह वर्कआउट “जॉइंट-फ्रेंडली ऑप्शन” है, इसलिए इसे नियमित एक्सरसाइज़ के तौर पर आसानी से अपनाया जा सकता है.

फिजिकल बेनिफिट्स के अलावा कोई भी नियमित वर्कआउट जिसमें 12-3-30 भी आता है, शरीर में खून का बहाव बढ़ाता है. इससे दिमाग ज़्यादा तेज चलता है और स्ट्रेस भी कम होता है. डॉ. सिंह के मुताबिक, “इसी वजह से ये वर्कआउट सिर्फ वजन कंट्रोल करने के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग को फ्रेश और रिलैक्स रखने के लिए भी बढ़िया है.”

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फिज़ियोलॉजिकली देखा जाए तो ट्रेडमिल का इनक्लाइन दिल की धड़कन को काफी बढ़ा देता है. इससे कार्डियोवस्कुलर स्टैमिना बेहतर होता है, लोअर बॉडी की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और कैलरी भी ज़्यादा बर्न होती हैं यानी वजन कंट्रोल में रखने के लिए यह काफी काम का वर्कआउट है.

हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट फिज़िशियन डॉ. दिलीप गुडे कहते हैं, “ये खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो जॉइंट पेन या किसी मेडिकल कंडीशन की वजह से हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट नहीं कर पाते.”

डॉ. गुडे के मुताबिक, मेंटल हेल्थ के लिहाज़ से भी यह वर्कआउट एक तरह के नेचुरल स्ट्रेस-रिलीवर की तरह काम करता है. बाकी एरोबिक एक्सरसाइज़ की तरह यह एंडॉर्फ़िन और सेरोटोनिन रिलीज़ करवाता है. ये वही वही हॉर्मोन हैं जो मूड को बेहतर करते हैं, एंग्जायटी को कम करने में मदद करते हैं और डिप्रेशन जैसे लक्षणों से लड़ने में मदद करते हैं. 

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वर्कआउट आपका मूड कैसे बेहतर रखता है? (Photo:Getty Images/Thinkstock)

एंड्यूरेंस की बात करें तो, डॉ. सिंह के मुताबिक 12-3-30 वर्कआउट धीरे-धीरेकार्डियोवस्कुलर स्टैमिना बढ़ाने में मदद करता है. यानी समय के साथ आपकी सहनशक्ति बेहतर होती है. लेकिन अगर कोई अपनी एंड्यूरेंस को और ज़्यादा लेवल पर बढ़ाना चाहता है, तो सिर्फ 12-3-30 काफी नहीं होगा. ऐसे लोगों के लिए बेहतर है कि वे अपने रूटीन में इंटरवल ट्रेनिंग, स्ट्रेंथ वर्कआउट या दूसरे एरोबिक एक्सरसाइज़ भी जोड़ें ताकि ओवरऑल फिटनेस ज़्यादा मजबूत बने.

12-3-30 वर्कआउट सिर्फ एक वजन घटाने का ट्रेंड नहीं है यह इससे कहीं ज़्यादा है. अगर इसे नियमित रूप से किया जाए और साथ में अच्छी डाइट और आराम भी लिया जाए तो यह शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से लंबे समय तक फायदा दे सकता है. डॉ. गुडे के अनुसार, “हालाँकि, जिन लोगों को पहले से कोई हेल्थ प्रॉब्लम है, उन्हें किसी भी नए वर्कआउट रूटीन की शुरुआत करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए.”

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डिस्क्लेमर: यह लेख पब्लिक डोमेन और विशेषज्ञों से की गई बातचीत और उनसे ली गई जानकारी पर आधारित है. कोई भी नया वर्कआउट या रूटीन शुरू करने से पहले हमेशा अपने हेल्थ प्रोफेशनल से सलाह लें.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
To read this article in English, click here.
Source: The Indian Express

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