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डॉ. राकेश गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल
हमारी सेहत के लिए गट बैक्टीरिया (आंतों के बैक्टीरिया) बेहद जरूरी हैं. लेकिन कई फैक्टर्स हमारे गट के संतुलन को बिगाड़ देते हैं, जिनमें से एक अल्कोहल है. इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. राकेश गुप्ता कहते हैं, “अल्कोहल गट बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर तब जब इसका सेवन बार-बार या अधिक मात्रा में किया जाए. हमारी आंतों में खरबों बैक्टीरिया होते हैं जो डाइजेशन, इम्युनिटी, विटामिन बनाने और इन्फ्लेमेशन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. अल्कोहल अच्छे बैक्टीरिया को कम करके और हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ा कर इस संतुलन को बिगाड़ देते है. यह 'गट परमीबिलिटी' को भी बढ़ाती है, जिसे अक्सर 'लीकी गट' कहा जाता है. इसकी वजह से टॉक्सिंस और बैक्टीरिया के अंश ब्लडस्ट्रीम में मिल जाते हैं और शरीर में इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं.”
समय के साथ, यह असंतुलन (गट डिस्बायोसिस) ब्लोटिंग, एसिडिटी, खराब पाचन, बार-बार होने वाले संक्रमण, थकान और यहां तक कि लिवर और मेटाबॉलिक हेल्थ को और भी खराब कर सकता है. कभी-कभार या सीमित मात्रा में अल्कोहल लेने से कुछ टेम्पररी चेंज हो सकते हैं जिनसे गट रिकवर कर सकता है, लेकिन रेगुलर या हैवी अल्कोहल इन्टेक लॉन्ग लास्टिंग डैमेज कर सकता है. यही कारण है कि जो लोग अक्सर अल्कोहल पीते हैं, उन्हें समय के साथ डाइजेशन रिलेटेड प्रॉब्लम्स और वीक इम्युनिटी का सामना करना पड़ सकता है.”
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बार-बार अल्कोहल का सेवन करने वालों को प्रोबायोटिक्स लेने की जरूरत है?
अल्कोहल का बार-बार सेवन करने वालों को प्रोबायोटिक्स से लाभ हो सकता है, लेकिन केवल प्रोबायोटिक्स ही इसका कम्पलीट सल्युशन नहीं हैं. चूंकि अल्कोहल गट के फायदेमंद बैक्टीरिया को कम कर देता है, इसलिए प्रोबायोटिक्स 'लैक्टोबैसिलस' (Lactobacillus) और 'बिफिडोबैक्टीरियम' (Bifidobacterium) जैसे सहायक स्ट्रेन्स के जरिए संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. ये डाइजेशन में सहायता कर सकते हैं, इंफ्लमैशन को कम कर सकते हैं और गट बैरियर (आंतों की सुरक्षा परत) को मजबूत कर सकते हैं.
लेकिन अगर अल्कोहल इन्टेक कम नहीं होता है तो प्रोबायोटिक्स भी कुछ खास कमाल नहीं कर पाते हैं. जब तक पेट के अंदर का एनवायरनमेंट खराब रहता है तब तक ये दवाइयां या अच्छे बैक्टीरिया ज्यादा असर नहीं दिखाते हैं.. प्रोबायोटिक्स के साथ-साथ, प्रीबायोटिक्स (फ़ूड फाइबर जो अच्छे बैक्टीरिया का पोषण करते हैं) भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. दही, छाछ, फर्मेंटेड फूड्स (खमीर वाले भोजन), फल, सब्जियां और साबुत अनाज प्रोबायोटिक्स को जीवित रहने और बढ़ने में मदद करते हैं. अल्कोहल इन्टेक की फ्रीक्वेंसी कम करना, हाइड्रेटेड रहना (भरपूर पानी पीना) और पर्याप्त प्रोटीन व माइक्रो न्यूट्रिएंट्स डाइट में शामिल करना जरूरी है. संक्षेप में, प्रोबायोटिक्स गट रिकवरी में सहायता कर सकते हैं, लेकिन पर्मानेंट सुधार तभी आता है जब अल्कोहल का सेवन कम किया जाए और डाइट की क्वालिटी में सुधार हो.
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गट बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाने वाले फैक्टर्स
अल्कोहल के अलावा कई अन्य चीजें और दवाएं भी गट बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इनमें सबसे कॉमन कारण एंटीबायोटिक्स हैं. एंटीबायोटिक्स बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया के साथ-साथ हमारे शरीर के 'अच्छे' बैक्टीरिया को भी खत्म कर देते हैं, जिससे लंबे समय के लिए असंतुलन पैदा हो सकता है. एंटीबायोटिक्स का बार-बार या बिना जरूरत इस्तेमाल डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स, इन्फेक्शन और वीक इम्युनिटी का खतरा बढ़ाता है. पेनकिलर्स जैसे कि Ibuprofen और Diclofenac का लंबे समय तक इस्तेमाल आंतों की परत को नुकसान पहुंचाता है. पेट में एसिड कम करने वाली दवाइयां (Antacids/PPIs) पेट के pH लेवल को बदल देती हैं, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिलता है. ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद आर्टिफिशियल मिठास गट के लाभकारी बैक्टीरिया को कम कर देती है. स्मोकिंग और क्रोनिक स्ट्रेस (लगातार तनाव) सीधे तौर पर गट के इकोसिस्टम को बिगाड़ते हैं. खाने पर मौजूद कीटनाशक और पर्यावरण में मौजूद विषैले तत्व भी बैक्टीरिया के लिए हानिकारक हैं.
हालांकि इनमें से कई दवाइयां इलाज के लिए जरूरी होती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब वाकई जरूरत हो. इनके साथ एक 'गट-फ्रेंडली' डाइट लेना बहुत जरूरी है ताकि नुकसान को कम किया जा सके.
गट हेल्थ को सुधारने के तरीके
गट हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए लाइफ स्टाइल और आहार में बदलाव जरूरी होते हैं. इसकी शुरुआत एक अच्छी डाइट से होती है जिसमें सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और नट्स शामिल हों. ये अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देते हैं. फर्मेंटेड फूड्सजैसे दही, छाछ नेचुरल प्रोबायोटिक्स का काम करते हैं और नए अच्छे बैक्टीरिया शरीर में पहुंचाते हैं.
अल्कोहल, बहुत अधिक प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी और स्मोकिंग को कम करना बेहद जरूरी है. पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव (stress) को मैनेज करना पाचन को प्रभावित करने वाले गट-ब्रेन सिग्नल्स को बेहतर बनाता है. एंटीबायोटिक्स या बीमारी के बाद थोड़े समय के लिए प्रोबायोटिक सप्लीमेंट मदद कर सकते हैं, लेकिन भोजन के जरिए रिकवरी अधिक टिकाऊ और प्रभावी होती है.
भरपूर पानी पीना और खाने को ठीक से चबाकर खाना भी पाचन में मदद करता है. गट को ठीक होने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लगता है इसलिए किसी 'क्विक फिक्स' के बजाय कंसिस्टेंसी ज्यादा मायने रखती है. एक स्वस्थ गट केवल सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि आपकी पूरी लाइफस्टाइल के संतुलन से बनता है.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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