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Breakfast Choices: ऑमलेट में ज्यादा सब्ज़ियां डालना और होल-ग्रेन ब्रेड चुनना इसे और हेल्दी बना सकता है. Photograph: (Pexels)
Healthy breakfast tips: बहुत से लोगों के लिए ब्रेड-ऑमलेट उनका सबसे पसंदीदा, रोज़ का नाश्ता होता है. न सिर्फ यह बेहद आसान और जल्दी बनने वाला होता है, बल्कि पोषण के लिहाज़ से भी काफी अच्छा माना जाता है. ब्रेड की कुरकुराहट और अंडे की मुलायम बनावट एकदम सही तरह से मिलकर इसके स्वाद को और बढ़ा देती है. लेकिन क्या होता है जब यह आपका रोज़ाना का नाश्ता बन जाता है?
डॉ. रोहिणी पाटिल, न्यूट्रिशनिस्ट और न्यूट्रेसी लाइफस्टाइल की संस्थापक एवं सीईओ का कहना है, “यदि सामग्री और मात्रा संतुलित हों तो रोज़ाना नाश्ते में ब्रेड ऑमलेट खाना बिल्कुल सामान्य और शरीर के लिए स्वस्थ है.”
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ब्रेड ही बनाती है बड़ा फर्क
पाटिल बताती हैं कि अंडे पोषण का पावरहाउस हैं जो उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, विटामिन बी, कोलाइन और आवश्यक अमीनो एसिड से भरपूर होते हैं. ये पोषक तत्व मांसपेशियों के निर्माण, मेटाबॉलिज़्म और कॉग्निटिव फंक्शंस को सहारा देते हैं. इसलिए, ब्रेड-ऑमलेट की पोषण गुणवत्ता का मुख्य निर्धारक ब्रेड का प्रकार और उसे पकाने का तरीका होता है. यहाँ देखें कि किस तरह अलग-अलग प्रकार की ब्रेड ओमलेट की पोषक संरचना को बदलती है:
सफेद ब्रेड: हाइली रिफाइंड, फाइबर कम होता है और जल्दी पच जाती है. इससे ब्लड शुगर जल्दी बढ़ता है और जल्दी भूख लगती है.
ब्राउन ब्रेड: अक्सर सिर्फ सफेद ब्रेड होती है जिसमें कैरामेल रंग मिलाया जाता है. यह तब तक हेल्दी नहीं मानी जाती जब तक कि इसमें व्होल व्हीट मुख्य सामग्री न हो.
व्होल व्हीट ब्रेड: इसमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व ज्यादा होते हैं. यह धीरे-धीरे पचती है, पेट को स्वस्थ रखती है और आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगने देती. इसे ही ग्रॉसरी स्टोर में चुनना चाहिए.
मल्टीग्रेन ब्रेड: यह तभी हेल्दी होती है जब पूरी तरह होल-ग्रेन से बनी हो. कई ब्रांड की ब्रेड अभी भी रिफाइंड फ्लॉर की होती हैं और सिर्फ ऊपर से बीज डाले होते हैं.

डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल या हार्ट की समस्या वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, लेकिन कुछ अंडे वो भी संतुलित आहार में शामिल कर सकते हैं. (Photo Credit: Wikimedia Commons)
न्यूट्रिशनिस्ट ज्यादा तेल, बटर या सफेद ब्रेड इस्तेमाल करने से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि इनमें न सिर्फ कैलोरी ज्यादा होती हैं बल्कि ये ब्लड शुगर भी जल्दी बढ़ाते हैं.
वे कहती हैं, “रोज़ाना एक ही चीज़ खाने से बचने के लिए कभी-कभी सामग्री बदलकर देखें, जिससे फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और माइक्रो नुट्रिएंट्स बढ़ें.” ऑमलेट में ज्यादा सब्ज़ियां डालना और होल-ग्रेन ब्रेड चुनना इसे और हेल्दी बना सकता है. पाटिल आगे कहती हैं कि स्ट्रीट या कैंटीन के ऑमलेट की बजाय घर पर बने ऑमलेट ही बेहतर हैं. पाटिल चेतावनी देती हैं, “क्योंकि ये अक्सर रिफाइंड ऑयल्स में कई बार तले जाते हैं, बटर या मार्जरीन ज्यादा इस्तेमाल होता है. इनमे कम गुणवत्ता वाली ब्रेड होती है और सब्ज़ियां भी कम होती हैं. इससे कैलोरी और ट्रांस-फैट का स्तर काफी बढ़ सकता है.”
क्या इससे वजन बढ़ सकता है?
न्यूट्रिशनिस्ट स्पष्ट करती हैं कि अंडे वजन नियंत्रित करने के लिए अच्छे हैं, क्योंकि इनमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन होता है जो पेट भरा रखने में मदद करता है, ब्लड शुगर को स्थिर रखता है और मिड मॉर्निंग क्रेविंग्स को कम करता है. पाटिल बताती हैं, “स्वस्थ लोगों के लिए रोज़ एक अंडा सामान्यत: सुरक्षित है. लेकिन वजन पर असर ब्रेड-ऑमलेट की सामग्री, ब्रेड का प्रकार और उसे पकाने के तरीके पर निर्भर करता है. ब्रेड और पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल मुख्य फैक्टर हैं.”
सफेद ब्रेड + ज्यादा तेल = ज्यादा कैलोरी → समय के साथ वजन बढ़ने की संभावना.
होल-ग्रेन ब्रेड + सीमित तेल = लंबे समय तक पेट भरा रहना, इंसुलिन रिस्पांस में सुधार और वजन बनाए रखना आसान.
इसलिए, अगर सही तरीके से बनाया जाए, तो ब्रेड-ऑमलेट वजन नियंत्रण में मदद कर सकता है. न्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं, “ज़रूरी है – सही पोरशन साइज, कम तेल इस्तेमाल करना और सब्ज़ियां या फल डालकर फाइबर बढ़ाना.”
(डिसक्लेमर: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और/या हमारे द्वारा बात किए गए विशेषज्ञों की जानकारी पर आधारित है. कोई भी नया आहार या रूटीन शुरू करने से पहले हमेशा अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें.)
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
To read this article in English, click here.
Source: The Indian Express
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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