/financial-express-hindi/media/media_files/2025/11/18/keep-your-kidneys-healthy-2025-11-18-12-53-59.jpg)
क्या किडनी की समस्या सिर्फ ब्लड टेस्ट से पता चल सकती है या इमेजिंग जरूरी है?Photograph: (AI Gemini)
किडनी की सेहत का प्रभावी ढंग से आकलन सरल ब्लड और यूरिन टेस्ट के माध्यम से किया जा सकता है. अधिकांश मामलों में, यही पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है. तो क्या इस मामले में अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग की आवश्यकता होती है? यह वही सवाल था जो एक Quora यूज़र ने पूछा: “क्या किडनी डैमेज को ब्लड टेस्ट के जरिए पता लगाया जा सकता है या इमेजिंग (अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन) जरूरी है?” विस्तृत जानकारी समझने के लिए, हमने विशेषज्ञों से बात की.
किडनी जांच: ब्लड और यूरिन टेस्ट से शुरुआती संकेत
वॉकहार्ड्ट हॉस्पिटल्स, मुंबई सेंट्रल के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट फिज़ीशियन, डॉ. निखिल भसीन ने बताया कि, “सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट और एस्टिमेटेड ग्लोमेरुलर फ़िल्ट्रेशन रेट (eGFR) ये दो मुख्य टेस्ट हैं जो बताते हैं कि आपकी किडनी खून से गंदगी कितनी अच्छी तरह साफ कर रही हैं. साथ ही, यूरिन टेस्ट में प्रोटीन या खून देखने से किडनी की बीमारी के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं.”
डॉ. महेश प्रसाद, सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी, KIMS हॉस्पिटल्स, ठाणे ने कहा कि कई अन्य बेहतर और जल्दी दिखने वाले मार्कर्स भी हैं जैसे KIM1, NGAL, B2 माइक्रोग्लोबुलिन आदि, लेकिन ये अभी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं.
डॉ. महेश ने बताया, "केवल ब्लड और यूरिन टेस्ट से पूरी तस्वीर नहीं मिलती ये सिर्फ यह बताते हैं कि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही, लेकिन ये उसके पीछे छिपे कारण नहीं बताते. इसीलिए, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग तकनीकें मददगार होती हैं. ये किडनी में पथरी, ब्लॉकेज या जन्मजात गड़बड़ियों जैसे स्ट्रक्चरल कॉसेस को पहचानने में मदद करती हैं. "
साधारण शब्दों में, ये टेस्ट किडनी की बनावट देखते हैं, पथरी, सिस्ट या ट्यूमर जैसी रुकावटें जांचते हैं और किडनी के शेप या साइज का आकलन करते हैं.
डॉ. भसीन ने कहा, "अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग हमेशा शुरुआती जांच का हिस्सा नहीं होते हैं." उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह समझना जरूरी है कि "भले ही किडनी ठीक से काम न कर रही हो तब भी इमेजिंग सामान्य दिख सकती है, क्योंकि ये स्कैन केवल किडनी की एनाटॉमी दिखाते हैं, यह नहीं कि किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है.”
Also Read: EPFO ने बढ़ाई पैसिव फंड की रफ्तार, ETFs और इंडेक्स फंड बने निवेशकों की पहली पसंद
ब्लड/यूरिन टेस्ट बनाम इमेजिंग: भूमिका और महत्व
ब्लड/यूरिन टेस्ट और इमेजिंग दोनों टेस्ट का अपना अलग-अलग महत्व है. डॉ. भसीन के अनुसार, “ब्लड और यूरिन टेस्ट यह देखते हैं कि किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है, जबकि इमेजिंग यह पता लगाने में मदद करती है कि किडनी ठीक से काम क्यों नहीं कर रही. स्क्रीनिंग के लिए या शुरुआती जाँच के लिए हमेशा ब्लड और यूरिन टेस्ट से शुरू करें. अगर इनमें किसी तरह गड़बड़ (abnormality) दिखे, तो इमेजिंग का इस्तेमाल संरचनात्मक कारण जानने के लिए किया जा सकता है.”
ऐसे समझें—ब्लड टेस्ट किडनी के कामकाज को दिखाते हैं, जबकि इमेजिंग किडनी की बनावट को. डॉ. महेश ने समझाया, “जो लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या के रिस्क में हो या जिनके परिवार में किडनी की समस्या रही हो उनके लिए नियमित ब्लड और यूरिन चेकअप बहुत जरूरी है. इमेजिंग की सलाह केवल तब दी जाती है जब कोई अब्नोर्मलिटी हो या कमर में दर्द, सूजन या यूरिन में खून जैसे विशेष लक्षण दिखाई दे.”
इन सरल टेस्ट के जरिए अर्ली डिटेक्शन कर के क्रॉनिक किडनी रोग को रोकने और भविष्य में डायलिसिस की आवश्यकता से बचने में बहुत मदद मिल सकती है.
Also Read: Tata Motors PV vs CV: किस डिवीजन के स्टॉक में ज्यादा पोटेंशियल? निवेशकों के लिए बड़ा सवाल
डिस्क्लेमर : यह लेख सार्वजनिक जानकारी और/या हमारे द्वारा संपर्क किए गए विशेषज्ञों की बातों पर आधारित है. किसी भी नियमित टेस्ट या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
To read this article in English, click here.
Source: The Indian Express
/financial-express-hindi/media/agency_attachments/PJD59wtzyQ2B4fdzFqpn.png)
Follow Us