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सावधान! एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग बन रहा है 'साइलेंट किलर', दवाएं हो रही हैं बेअसर

एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग बैक्टीरिया को शक्तिशाली बनाकर दवाओं को बेअसर कर रहा है. पीएम मोदी और विशेषज्ञों की सलाह है बिना डॉक्टर के पर्चे के दवा न लें, कोर्स पूरा करें और सेल्फ-मेडिकेशन से बचें ताकि जीवन रक्षक दवाएं भविष्य में काम कर सकें.

एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग बैक्टीरिया को शक्तिशाली बनाकर दवाओं को बेअसर कर रहा है. पीएम मोदी और विशेषज्ञों की सलाह है बिना डॉक्टर के पर्चे के दवा न लें, कोर्स पूरा करें और सेल्फ-मेडिकेशन से बचें ताकि जीवन रक्षक दवाएं भविष्य में काम कर सकें.

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FE Hindi Desk
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डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना खतरनाक हो सकता है . Photograph: (Freepik)

एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित हुआ है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया ‘मन की बात’ संबोधन में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने के खिलाफ चेतावनी दी. एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के बढ़ते प्रमाणों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक न लें. उन्होंने जोर देकर कहा कि लापरवाही से इन दवाओं का उपयोग आम संक्रमणों का इलाज और अधिक कठिन बना रहा है.

एंटीबायोटिक ऐसी दवाएं हैं, जो बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण से लड़ने के लिए बनाई जाती हैं. सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर ये हर साल लाखों लोगों की जान बचाती हैं. लेकिन जब इन्हें बिना जरूरत, गलत मात्रा में या डॉक्टर द्वारा बताई गई अवधि पूरी किए बिना लिया जाता है, तो ये न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को, बल्कि पूरे सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को भी फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकती हैं.

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डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग को लेकर क्यों चिंतित हैं

पूर्व एम्स दिल्ली निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनके इंफेक्शंस अब सामान्य एंटीबायोटिक्स पर रेस्पॉन्ड नहीं करते. उन्होंने कहा, “अस्पतालों में भर्ती कई मरीजों, खासकर आईसीयू में भर्ती मरीजों में कई बार ऐसे इंफेक्शंस विकसित हो जाते हैं जिन पर कोई भी एंटीबायोटिक काम नहीं करता. ये मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट इंफेक्शंस हैं, और इसका मुख्य कारण एंटीबायोटिक का दुरुपयोग है.”

डॉ. गुलेरिया ने लोगों को यह चेतावनी दी कि बुखार, खांसी, लूज़ मोशंस, पेट में तकलीफ या यूरीनेशन के दौरान जलन जैसे सामान्य लक्षणों के लिए खुद से एंटीबायोटिक दवाएं न लें. उन्होंने कहा, “अगर आपको कोई भी स्वास्थ्य समस्या है तो एंटीबायोटिक दवाएं खुद से न लें. अपने डॉक्टर से सलाह लें और केवल उचित मार्गदर्शन के बाद ही इन्हें लें.”

जब एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल होता है, तो शरीर में क्या होता है?

जब आप बिना ज़रूरत या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेते हैं, तो आपके शरीर के बैक्टीरिया दवा (Medicine) को पहचान लेते हैं और उससे बचने का तरीका सीख जाते हैं. धीरे-धीरे ये बैक्टीरिया इतने शक्तिशाली हो जाते हैं कि दवा उन पर बेअसर हो जाती है. इसका नतीजा यह होता है कि जब आप वाकई बीमार पड़ते हैं और आपको दवा की ज़रूरत होती है, तो वे दवाएं आपके शरीर पर काम ही नहीं करतीं.

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. पॉल ने बताया कि बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करने से एंटीबायोटिक दवाओं की ताकत खत्म हो जाती है. उन्होंने कहा, "गलत और बहुत ज़्यादा इस्तेमाल की वजह से कीटाणु (पैथोजन्स) अब दवाओं से लड़ना सीख गए हैं. रिसर्च से पता चला है कि कई ज़रूरी एंटीबायोटिक दवाएं अब जानलेवा बीमारियों पर भी असर नहीं कर रही हैं."

डॉ. पॉल के अनुसार, इस 'दवा प्रतिरोध' (resistance) की वजह से बीमारियां और भी गंभीर हो जाती हैं, लंबे समय तक चलती हैं और उनका इलाज करना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति में मरीजों को बहुत स्ट्रांग दवाओं की ज़रूरत पड़ती है, उन्हें ज़्यादा दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है और कभी-कभी तो उन पर किसी भी इलाज का असर नहीं होता.

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ICMR की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि निमोनिया और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) जैसी बीमारियों के खिलाफ एंटीबायोटिक्स अब बेअसर होती जा रही हैं. उन्होंने कहा, "इसका सबसे बड़ा कारण लोगों द्वारा एंटीबायोटिक्स का बिना सोचे-समझे किया जाने वाला इस्तेमाल है."

प्रधानमंत्री ने इस बढ़ती धारणा के खिलाफ चेतावनी दी कि "एक गोली हर चीज़ का इलाज कर सकती है." उन्होंने कहा कि यह मानसिकता संक्रमण को और अधिक शक्तिशाली और इलाज में कठिन बना रही है. उन्होंने लोगों से सेल्फ-मेडिकेशन से सख्ती से बचने का आग्रह करते हुए कहा,"दवाओं को मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, और एंटीबायोटिक्स को डॉक्टरों की."

भारत में दवाओं तक आसान पहुंच समस्या को बढ़ा रही है

केरल राज्य इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के रिसर्च सेल के संयोजक और आईएमए कोचीन साइंटिफिक कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग ग्लोबल हेल्थ क्राइसिस को बढ़ावा दे रहा है.

उन्होंने कहा, “एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (रोगाणुरोधी प्रतिरोध) एक गंभीर समस्या है जो पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही है. अत्यधिक उपयोग के कारण एंटीबायोटिक्स खतरनाक बैक्टीरिया को मारने की अपनी क्षमता खो रहे हैं.”

डॉ. जयदेवन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में अक्सर बिना डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के ही मेडिकल स्टोर्स पर एंटीबायोटिक्स बेच दी जाती हैं. उन्होंने कहा, “कुछ लोग मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक्स उतनी ही आसानी से खरीदते हैं जैसे वे फल और सब्जियां खरीदते हैं. विकसित देशों में यह स्वीकार्य नहीं है, वहां प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य होता है.”

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लंबे समय के परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता. प्रतिरोधी संक्रमण (रेसिस्टेंट इंफेक्शंस) आसानी से फैलते हैं, जिससे बीमारियों के प्रकोप को रोकना और भी कठिन हो जाता है. मरीजों को लंबी बीमारी, बार-बार होने वाले इंफेक्शंस और भारी मेडिकल खर्चों का सामना करना पड़ सकता है. गंभीर मामलों में, सामान्य से दिखने वाले इंफेक्शंस भी जानलेवा बन सकते हैं.

डॉ. जयदेवन ने समझाया, “जब बैक्टीरिया रेसिस्टेंट हो जाते हैं, तो एंटीबायोटिक्स काम करना बंद कर देते हैं. बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ जीवित रहने के लिए अपने अंदर विशेष मैकेनिज्म विकसित कर लेते हैं.” उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया को धीमा करने का एकमात्र तरीका यह है कि एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक उपयोग को तुरंत रोका जाए.

विशेषज्ञों के अनुसार क्या बदलाव ज़रूरी हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि सख्त नियम ही इस समस्या का समाधान है. डॉ. जयदेवन ने बिना डॉक्टर के पर्चे के (over-the-counter) एंटीबायोटिक की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है. उन्होंने कहा, "एंटीबायोटिक्स केवल तभी दी जानी चाहिए जब डॉक्टर मरीज की जांच कर ले और पर्चा (प्रिस्क्रिप्शन) लिखे. विकसित देशों में यही होता है."

इस मामले में डॉक्टरों की भी बड़ी जिम्मेदारी है. डॉ. वी.के. पॉल ने कहा कि चिकित्सा पेशेवरों को जिम्मेदारी के साथ एंटीबायोटिक लिखनी चाहिए और स्टैण्डर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स का पालन करना चाहिए. उन्होंने कहा, "डॉक्टरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एंटीबायोटिक्स केवल तभी दी जाएं जब उनकी वास्तव में आवश्यकता हो."

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने भी प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन किया है. एनएमसी ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को रोकने के लिए सख्त नियंत्रण और जिम्मेदारी से दवा लिखने की प्रक्टिसेस का समर्थन किया है.

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जनता के लिए एक सीधा और सरल संदेश

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पॉलिसी मेकर्स की चेतावनी बिल्कुल स्पष्ट है: एंटीबायोटिक्स कोई दर्द निवारक (पेनकिलर्स) या तुरंत आराम देने वाली दवाएं नहीं हैं. ये बहुत पावरफुल दवाएं हैं जिनका उपयोग अत्यंत सावधानी से और केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

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