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बॉलीवुड बिलियनेयर्स के इस अंक में बताया गया है कि कैसे जूही चावला ने चुपचाप लाइमलाइट से दूर रह कर कई हज़ार करोड़ की संपत्ति का साम्राज्य खड़ा किया. Photograph: (Instagram/Juhi Chawla)
बॉलीवुड बिलियनेयर्स इस सीरीज में अभिषेक बच्चन ने आपको दिखाया कि फिल्मी परिवार का हिस्सा होकर भी एक अनुशासित निवेशक की तरह कैसे सोचना चाहिए. सोनम कपूर ने यह प्रेरणा दी कि सोशल मीडिया को सीरियस बिज़नेस की तरह कैसे संभालना चाहिए, जबकि डैनी डेनज़ोंगपा ने यह दिखाया कि एक कोमल स्वर वाला चरित्र अभिनेता भी चुपचाप एक बीयर साम्राज्य कैसे खड़ा कर सकता है.
बॉलीवुड बिलियनेयर्स के इस नए संस्करण में हम जूही चावला को पेश कर रहे हैं.
भारत के एक शीर्ष स्कूल में हुई एक छोटी सी शर्मिंदगी से शुरू होता है यह सफर.
आपकी टीम रैंकिंग में सबसे नीचे है. आपके सहपाठी सबसे बेहतरीन टीम की जर्सी पहनते हैं. उनके माता-पिता उसके मालिक हैं और आपके माता-पिता वो हैं जिनका हर कोई मज़ाक उड़ाता है.
आईपीएल के शुरुआती वर्षों में कोलकाता नाइट राइडर्स एक फ्रैंचाइज़ी के बजाय वीकली रोस्ट की तरह महसूस होती थी: स्टैंड में शाहरुख़ ख़ान काली- सुनहरी और बैंगनी जर्सी पहने हुए खड़े रहते थे. मार्केटिंग उफान पर होती थी लेकिन टीम की जीत बेहद कम देखने को मिलती थी.
जूही चावला अक्सर यह बताती हैं कि वह दौर में घर के हालत कितने कठिन थे. उनके बच्चे धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ते थे जहाँ मुंबई इंडियन्स के समर्थकों भरे पड़े थे.
हर बार जब KKR हार जाती, तो बच्चों को उसी क्लासरूम में वापस जाना पड़ता. जहाँ अंबानी परिवार की टीम जीतती और उनके बच्चों के माता-पिता की टीम हार का सामना करती. स्कूल में लगातार उनका मज़ाक उड़ाया जाता.
रात को जूही शाहरुख़ खान (Shah Rukh Khan) और जय मेहता के साथ ओनर के बॉक्स में बैठतीं. जब मैच रोमांचक मोड़ पर होता वो हाथ जोड़कर, टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए जोर-जोर से चीखती जिससे आवाज़ भी बैठ जाती थी.
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जूही चावला शाहरुख़ ख़ान और जय मेहता के साथ पोज़ देती हुई (Image source: Instagram/Juhi Chawla)
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द कपिल शर्मा शो में उन्होंने बताया कि जब भी हालात खराब होते थे तो वह धीरे-धीरे जो भी मंत्र या प्रार्थना उन्हें याद आती, उसका जप करने लगतीं- गायत्री मंत्र से लेकर जो भी उनके दिमाग़ में आता वे सबका जाप करने लगती थीं. दुनिया के सब देवताओं को याद कर डालती. और शाहरुख़ उन पर ऐसे ग़ुस्सा दिखाते जैसे उन्होंने मैच में कैच छोड़े हों.
उन स्कूल के मज़ाकों और स्टेडियम में बीती वो उत्साह और पागलपन से भरी शामों के बीच ही जूही चावला की असली संपत्ति का राज़ छिपा है.
Hurun Rich List 2025 के मुताबिक, जूही चावला अब भारत की सबसे अमीर महिला अभिनेता हैं. उनकी कुल संपत्ति लगभग 7,790 करोड़ रुपये है. यह दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट जैसी युवा अभिनेत्रियों से भी ज्यादा है.
इसका मतलब है कि वह कई पुरुष सुपरस्टार्स से भी ज़्यादा अमीर हैं, जो अभी भी बड़े बजट की फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाते हैं.
यह सब उन्होंने तब हासिल किया है, जबकि पिछले कुछ सालों में उनकी कोई बड़ी फिल्म रिलीज़ नहीं हुई और कभी-कभार ही किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर उन्होंने अभिनय किया है.
वो लड़की जिसे दर्शक सरसों के खेतों में दौड़ते हुए याद रखते हैं, अब चुपचाप उस महिला में बदल चुकी है जिसकी संपत्ति टीम की नीलामी, सीमेंट की मांग और मालाबार हिल में समंदर के किनारे वाली प्रॉपर्टी की कीमत के साथ बढ़ती-घटती रहती है.
यह चीज़ आप स्क्रीन पर नहीं देखते.
शाहरुख़ ख़ान कैसे बने जूही चावला के सबसे कामयाब को-स्टार
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शाहरुख़ और जूही चावला ने लगभग दर्जन भर फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें डर, राजू बन गया जेंटलमैन, यस बॉस, डुप्लीकेट और फिर भी दिल है हिंदुस्तानी शामिल हैं.
टीम की नीलामी और फ्रेंचाइज़ी के वैलुएशन्स से बहुत पहले वह साझेदारी जिसने उनकी मनी स्टोरी बदल दी, एक बहुत ही छोटे जहान में शुरू हुई थी. यह शुरू हुई थी एक फिल्म सेट पर.
नब्बे के दशक में जूही और शाहरुख़ ऑफिस के साथी जैसे थे, जिन्होंने लगभग दर्जन भर फिल्मों में साथ काम किया. डर, राजू बन गया जेंटलमैन, यस बॉस, डुप्लीकेट, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी जैसी फिल्में इनमें से कुछ ही फ़िल्में हैं.
जैसे ही वह दशक समाप्त हुआ, वे सिर्फ़ को-स्टार ही नहीं रहे, वे एक-दूसरे की आदत बन गए थे. शाहरुख़ को पता था कि जूही किसी कॉमिक बीट को कैसे लेंगी. और जूही को भी पता था कि वह कैसी किसी मोमेंट मजाक करने लगेंगे.
उस त्रिभुज का तीसरा बिंदु निर्देशक अजीज़ मिर्ज़ा था, जिन्होंने शाहरुख़ को टीवी से ऊपर उठते देखा और जूही को मिस इंडिया से एक भरोसेमंद मुख्य अभिनेत्री बनते देखा.
जब यह तीनों दशक के अंत में एक कंपनी Dreamz Unlimited की स्थापना करने लगे, तो यह स्वाभाविक लग रहा था. इसके पीछे सोच यही थी कि अभिनेता चेहरे और फीस लाएंगे और मिर्ज़ा फिल्में बनाएंगे.
ऑन पेपर यह एक स्मार्ट मूव लग रहा था, लेकिन सिनेमा में यह कुछ खास असर नहीं दिखा सका. फिर भी दिल है हिंदुस्तानी और अशोका दोनों फ़िल्में फ्लॉप हो गईं. कंपनी कभी उस स्टूडियो में नहीं बदल पाई जिसकी उन्होंने कल्पना की थी, और अंततः शाहरुख़ ने गौरी के साथ मिलकर अपनी एनर्जी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट में लगाई.
Dreamz Unlimited कुछ ख़ास नहीं कर पाया लेकिन इसने जूही और शाहरुख़ को उनके पहले असली बिज़नेस तूफ़ान से जरूर मिलवाया.
उन्होंने चेक लिखे, अपने पैशन प्रोजेक्ट को पैसे खोते देखा और यह भी सीखा कि शुक्रवार को बॉक्स ऑफिस कितना बेरहम हो सकता है, जब आप स्क्रीन पर हैं और साथ ही बैलेंस शीट भी देख रहे हैं. फिर उन्होंने वही किया जो काम करने वाले अभिनेता करते हैं.
वे सोमवार को फिर से सेट पर लौट गए.
तो जब कई साल बाद आईपीएल का आइडिया आया और क्रिकेट बोर्ड ने स्टार मालिकों की तलाश शुरू की, यह कोई अचानक आया हुआ प्रस्ताव नहीं था. शाहरुख़ रेड चिलीज़ के ज़रिए जुड़े. और जूही अपनी शादी के ज़रिए जय मेहता तथा मेहता परिवार की इंडस्ट्रियल कैपिटल के साथ इस दुनिया में आईं.
पुरानी दोस्ती चुपचाप एक औपचारिक बिज़नेस साझेदारी में बदल गई—इस बार एक ऐसे खेल में, जहाँ सीज़न लंबे होते हैं, कॉन्ट्रैक्ट सख़्त होते हैं और धैर्य का कहीं बड़ा इनाम मिलता है.
यही वह सीधी कड़ी है जो एक फिल्मी को-स्टार को कई हज़ार करोड़ की कीमत वाली फ्रैंचाइज़ी के को-ओनर तक ले जाती है. यह कोई एक बड़ी नाटकीय छलाँग नहीं थी बल्कि एक दशक तक साथ में किया गया काम, एक थका देने वाली प्रोडक्शन कंपनी और साथ में यह समझ कि अगर पब्लिक में चीज़ें खराब हो भी जाएँ, तो यही वो इंसान है जिसके साथ आप पैसा डुबाने को भी तैयार है.
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75 मिलियन डॉलर की बाज़ी: क्यों एक्सपर्ट्स ने कहा ‘ना’
आज पीछे मुड़कर देखने पर पहली KKR नीलामी सामान्य लगती है. आईपीएल आज अपना खुद का कैलेंडर, राजनीति और वैल्यूएशन वाला एक ग्लोबल एंटरटेनमेंट इंजन है. लेकिन जब पहली नीलामी हुई थी वह एक पागलपन भरा प्रयोग था.
जय मेहता ने बताया कि उस समय यह डील कितनी अजीब और ख़तरनाक लग रही थी. वह और शाहरुख़ कोलकाता फ्रैंचाइज़ी के लिए लगभग 75 मिलियन डॉलर चुकाने पर राज़ी हुए थे.
लीग उस समय बस कागज़ पर एक आइडिया भर थी. इसकी कोई गारंटी नहीं थी कि छोटा फॉर्मेट, चीयरलीडर्स और प्राइम-टाइम ड्रामा का ये मिश्रण उस देश में चलेगा भी की नहीं जहाँ लोग पाँच दिन के टेस्ट मैच और एंडलेस वनडे देखने के आदी थे.
इंडस्ट्री के दोस्तों ने तो जय मेहता से साफ कह दिया था कि उनका दिमाग़ फिर गया है.
और जूही? उन्होंने चुपचाप इस सफ़र में साथ देने के लिए हाँ कर दी.
यह बात ध्यान देने लायक है कि उस समय इसका जूही की निजी ज़िंदगी में क्या मतलब था. वह अपने फिल्मी स्टारडम के शिखर पर खड़ी कोई खेल-खेल में फैसला लेने वाली अभिनेत्री नहीं थीं.
जब KKR उनके जीवन में आई, तब उनकी लीडिंग लेडी वाली फ़िल्में पीछे छूट चुकी थीं.
वह अपने रोमांटिक हिट्स का दौर पूरा कर चुकी थीं, प्रोडक्शन में हाथ आज़मा चुकी थीं और बहुत करीब से देख चुकी थीं कि शाहरुख़ के साथ की गई साझेदारी कैसे गलत हो सकती है, जैसा कि Dreamz Unlimited के बंद होने पर हुआ था.
ज्यादातर लोग अगर उनकी जगह होते तो एक बार बिज़नेस में की गई गलती के बाद पीछे हट जाते. लेकिन जूही ने वही पार्टनर लेकर एक और , पहले से भी कहीं बड़ा दांव खेला. और, इस बार चेक डॉलर में था.
यह जो जोखिम था उसका एक हिस्सा उनकी अपनी बैलेंस शीट पर था और बाकी मेहता परिवार की बैलेंस शीट पर.
अब जब आईपीएल की वैल्यूएशन जिज्ञासा से बढ़कर हैरान करने वाली ऊँचाइयों तक पहुँच गई, तब वह शुरुआती छलांग एक जुए की तरह नहीं दिखती बल्कि नए एसेट क्लास में पीढ़ियों तक चलने वाली संपत्ति के ट्रांसफ़र जैसी लगती है.
हाल के अनुमान बताते हैं कि KKR की कीमत अब 9,000 करोड़ रुपये से भी ऊपर मानी जाती है.
इसका मतलब यह है कि हर अच्छा सीज़न और हर नया ब्रॉडकास्ट चक्र चुपचाप उनकी निजी नेट वर्थ बढ़ा देता है फिर चाहे वह फिल्म कर रही हों या नहीं.
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मिस इंडिया से मालाबार हिल तक जूही का सफर
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जूही चावला ने 1984 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब जीता था और बॉलीवुड अभिनेत्री रेखा ने उन्हें ताज पहनाया था (Image source: YouTube)
जूही की सार्वजनिक कहानी 1984 से शुरू होती है, जब उन्होंने मिस इंडिया जीता था. उसके बाद उनकी ज़िंदगी तेज़ी से आगे बढ़ने लगी.
एडवर्टाइज़िंग. मॉडलिंग. फिल्म सल्तनत में एक छोटा रोल. और फिर असली उड़ान- आमिर खान के साथ क़यामत से क़यामत तक.
नब्बे के दशक की शुरुआत तक वह इंडस्ट्री की सबसे भरोसेमंद हीरोइनों में से एक बन चुकी थीं. उनमें पड़ोस की लड़की जैसा अपनापन और कमाल की कॉमिक टाइमिंग का परफेक्ट मिश्रण था.
प्रोड्यूसर उन्हें पसंद करते थे क्योंकि वह भरोसेमंद थीं.और को-स्टार उन्हें पसंद करते थे क्योंकि किसी सीन को टग ऑफ़ वॉर बनाए बिना वह उसे आसानी से निभा लेती थीं.
उसी दौर में उनके करियर के रास्ते पर एक और मोड़ आया था, जो उनकी पूरी दिशा बदल सकता था.
उनका स्क्रीन टेस्ट इतना अच्छा था कि बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक टीवी शो महाभारत में उन्हें द्रौपदी का रोल लगभग मिल ही गया था. लेकिन तभी क़यामत से क़यामत तक सामने आई और सब कुछ बदल गया.
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आमिर खान और जूही चावला क़यामत से क़यामत तक के एक दृश्य में.
क्या चुनना है यह तय न कर पाने पर उन्होंने एक दिग्गज फिल्ममेकर से सलाह मांगी. चोपड़ा ने उन्हें कहा कि टीवी की बजाय फिल्मों पर ध्यान दें.
उनकी किस्मत रही कि वह फिल्म एक कल्चरल मील का पत्थर बन गई और जूही और आमिर दोनों को इस फिल्म ने इतिहास में दर्ज करा दिया.
यह है उनका सिनेमाई रिकॉर्ड. और इसके नीचे है उनकी पैसा वाली कहानी.
फ्लैट्स, प्लॉट्स और बंगले की सही संख्या निजी राखी गई है, लेकिन हर सीरियस लिस्ट जो उनके धन का अनुमान लगाती है, उसमें रियल एस्टेट तीन बड़े स्तंभों में से एक माना जाता है.
बाकी दो हैं KKR और कुछ व्यवसाय जिनमें जूही और जय मालिक हैं.
शर्मिंदगी को यूनिकॉर्न में बदलना: KKR की तब्दीली
वो शुरुआती KKR सीज़न बेहद मुश्किल थे.
बदलाव में सालों लग गए. मैनेजमेंट में बदलाव, एक अलग कप्तान, नीलामी में कुछ स्मार्ट चुनाव. और एक सचेत निर्णय कि टीम को मनोरंजन शो की तरह नहीं, बल्कि एक असली खेल उद्यम की तरह ट्रीट किया जाए.
लीग भी बढ़ी. ब्रॉडकास्टिंग डील्स बड़ी हुईं. डिजिटल राइट्स आए. और फ्रैंचाइज़ी की वैल्यूज़ महत्वाकांक्षा से बढ़कर लगभग असंभव ऊँचाइयों तक पहुँच गईं.
अब नतीजे रिच लिस्ट में दिखते हैं. आईपीएल टीम की हर नई वैल्यूएशन कोलकाता को ऊँचा ले जाती है. और टीम की वैल्यू बढ़ने पर जूही की निजी नेट वर्थ भी बढ़ती है, भले ही उन्होंने लंबे समय से कोई बड़ी हिट फिल्म न दी हो.
दुनिया में बहुत कम फिल्म स्टार्स हैं जिनकी संपत्ति पिछले शुक्रवार की कमाई पर कम और हर सीज़न उनकी क्रिकेट टीम की सफलता पर ज्यादा निर्भर हो. जूही उन्हीं में से एक हैं.
इसे आप किस्मत की सही टाइमिंग कह सकते हैं. लेकिन यह वही होता है जब आप शर्मिंदगी भरे सीज़न में भी धैर्य बनाए रखते हैं और खिलाड़ी के चेक साइन करते रहते हैं, जबकि आपके बच्चे उन सहपाठियों की वजह से रोते हैं जो जीतने वाली टीम का समर्थन करते हैं.
पिज़्ज़ा, सीमेंट और रियल एस्टेट: धन बनाने वाले ‘बोरिंग’ साधन
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जूही चावला का पोर्टफोलियो तेज़ सुर्ख़ियों के बजाय धीरे-धीरे बढ़ने के लिए तैयार किया गया है. (Image source: Instagram/Juhi Chawla)
उनके बाकी पोर्टफोलियो को समझने के लिए आपको स्टेडियम छोड़ना होगा और मुंबई के एक बहुत ही खास हिस्से में जाना होगा.
शुरुआत करें काला घोड़ा से. यह बिज़नेस डिस्ट्रिक्ट अब आर्ट क्रॉल के लिए भी जाना जाता है. इसके एक छोटे से गली में छिपा है Rue du Liban, एक ऐसा रेस्तरां जो लेवेंट की एक परिष्कृत फ़ैंटेसी पेश करता है.
पीतल, संगमरमर, शीशा, मेज़े. यह वह जगह है जहाँ युवा बैंकर अपने क्लाइंट्स को ले जाते हैं, जो फोर्ट छोड़े बिना ही अंतरराष्ट्रीय अनुभव महसूस करना चाहते हैं.
बांद्रा जाएँ और आपको Gustoso मिलेगा. यह एक इटालियन डाइनिंग रूम है जो अपने पिज़्ज़ा को बहुत गंभीरता से लेता है. असली नेपोलिटन क्रस्ट, लकड़ी के ओवन और मेन्यू ऐसा लगता है जैसे सीधे किसी ट्रैटोरिया से अनुवाद किया गया हो.
ये उनके फ़िल्मों के पोस्टरों वाला फैन कैफ़े नहीं हैं. ये असली हॉस्पिटैलिटी बिज़नेस हैं जिनमें शेफ, स्टाफ़, रेंट और जोखिम सब शामिल हैं. सालों में इन रेस्तराओं ने उस शहर में खुद की एक अलग पहचान बनाई है. ये चुपचाप परिवार की बैलेंस शीट में एक और लाइन की तरह बैठी रहती हैं.
फिर आता है पूरी तरह से गैर-ग्लैमरस हिस्सा.
सौराष्ट्र सीमेंट उन ग्रुप कंपनियों में से एक है जहाँ जूही का नाम सीधे शेयरहोल्डिंग पैटर्न में दिखता है. आपको कंपनी का एक छोटा हिस्सा उनके अपने नाम पर मिलेगा, और एक और छोटा सा हिस्सा परिवार ट्रस्ट के माध्यम से लिया दिखेगा.
ग्रुप के संदर्भ में प्रतिशत छोटा है, लेकिन संदेश साफ़ है. वह सिर्फ़ एक ऐसी पत्नी नहीं हैं जिन्हें कागज़ात से दूर रखा गया हो. उनका नाम असली शेयरों में, एक असली इंडस्ट्रियल कंपनी में है.
इन सब चीज़ों को मिलाकर तस्वीर आसान हो जाती है. एक ऐसी क्रिकेट टीम जो लीग में खूब पैसा कमाती है. मुंबई के खास इलाक़ों में अच्छे रेस्तरां. परिवार की सीमेंट कंपनी में सीधे उनके शेयर और बहुत सारी प्रॉपर्टी.
यह पोर्टफोलियो इस तरह से बनाया गया है कि वो धीरे-धीरे और पक्के तरीके से बढ़े न कि जल्दी सुर्ख़ियों में आने के लिए नहीं.
पब्लिक इंटरेस्ट केस में शर्मिंदगी का सामना
कोई भी बैलेंस शीट की कहानी बिना गलती के पूरी नहीं होती.
हाल के सालों में सबसे ज़्यादा नजर आने वाली गलती एक ऐसे मामले से आई, जो चिंता से शुरू हुई लेकिन सार्वजनिक शर्मिंदगी में बदल गई.
जूही दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका का चेहरा बन गईं, जिसने भारत में पांचवीं पीढ़ी के टेलीकॉम टावर्स के स्वास्थ्य पर सवाल उठाए. कोर्ट इससे प्रभावित नहीं हुआ.
जजों ने याचिका को खारिज कर दिया, इसे प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया और याचिकाकर्ताओं पर भारी जुर्माना लगा दिया. वर्चुअल सुनवाई तब खुद ही मज़ाक बन गई जब कुछ अजनबी वीडियो लिंक में घुस आए और जूही की फिल्मों के गाने गाने लगे.
बाद में जूही ने एक वीडियो जारी किया और कहा कि वह नई तकनीक के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं. उन्होंने बताया कि वह केवल यही चाहती थीं कि अधिकारी यह प्रमाणित करें कि रेडिएशन स्तर सुरक्षित हैं.
इससे कोई फर्क नहीं पड़ा. सुनवाई का क्लिप, मज़ाक और जुर्माना अब उनके सार्वजनिक रिकॉर्ड का स्थायी हिस्सा बन गए.
एक ऐसे व्यक्ति के लिए जिसकी संपत्ति गंभीर व्यवसाय में निहित है और जो, चाहे अनौपचारिक ही सही, औद्योगिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है, यह याद दिलाता है कि जटिल नीतिगत लड़ाइयों के लिए अदालत और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए अलग तरह की तैयारी की ज़रूरत होती है.
जूही चावला की बैलेंस शीट आपको असल में क्या बताती है
कागज़ पर, इंडस्ट्री में कुछ और भी अमीर नाम हैं. युवा चेहरे जिनके पास बड़ी स्ट्रीमिंग डील्स और ब्रांड रिटेनर्स हैं. लोग जिनकी सेल्फ़ी की मात्रा कई क्लाउड सर्वर भर सकती है और जिनके कॉन्ट्रैक्ट भविष्यसूचक लगते हैं.
लेकिन बुनियादी तौर पर, जूही ज्यादा सुरक्षित दिखती हैं.
उन्होंने अपने सबसे अच्छे कमाई वाले सालों में भी काम करना जारी रखा, जबकि शादी उनके करियर को जल्दी ही रोक सकती थी. उन्होंने उस समय क्रिकेट टीम के लिए चेक साइन किया, जब अनुभवी बिज़नेस लोग भी इसे मूर्खतापूर्ण कह रहे थे.
जूही चावला की बैलेंस शीट आपको असली में क्या बताती है
ऑन पेपर इंडस्ट्री में कुछ और भी अमीर नाम हैं. इनमें कई युवा चेहरे हैं जिनके पास बड़ी स्ट्रीमिंग डील्स और ब्रांड रिटेनर्स हैं. वे लोग हैं जिनके सेल्फ़ी आउटपुट कई क्लाउड सर्वर भर सकते हैं और जिनके कॉन्ट्रैक्ट फ्यूचरिस्टिक लगते हैं.
लेकिन बुनियादी तौर पर, जूही ज्यादा सुरक्षित दिखती हैं.
उन्होंने अपने सबसे अच्छे कमाई वाले सालों में भी काम करना जारी रखा, जबकि शादी उनके करियर को जल्दी ही रोक सकती थी. उन्होंने उस समय क्रिकेट टीम के लिए चेक साइन किया, जब अनुभवी बिज़नेस से जुड़े लोग भी इसे मूर्खतापूर्ण कह रहे थे.
उन्होंने एक शहर में रेस्तरां में निवेश किया, जहां रेंट कमजोर आइडियाज़ को खत्म कर देता है. उनके पास सीमेंट कंपनी में हिस्सा है, चाहे छोटा ही क्यों न, जिसका प्रोडक्ट सचमुच दशकों तक दूसरों की ज़िंदगी के साथ चलता रहेगा.
इसमें से कुछ भी फ़्लैशी नहीं है. ज़्यादातर चीज़ें बाहर से दिखाई ही नहीं देतीं, सिवाय इसके कि आप फ़ाइलिंग और फ़्रैंचाइज़ी के वैलुएशन्स को मजे के लिए पढ़ें.
यहीं कहानी में एक ट्विस्ट हैं, जो हिंदी सिनेमा के सबसे प्रिय सितारों में से एक के बारे में है.
गाल में डिंपल वाली जिस लड़की को दर्शक फिल्मों में याद करते हैं, वह अब वो महिला है जिसकी संपत्ति अब टीम की नीलामी, सीमेंट की मांग और मलाबार हिल में सी व्यू रियल एस्टेट की कीमतों के साथ जुड़ी हुई है.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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