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भारतीय फैशन जगत के एक युग का अंत. भारत की पहली मिस इंडिया और दिग्गज पत्रकार मेहर कास्टेलिनो नहीं रही. Photograph: (Instagram)
भारत की पहली मिस इंडिया और और एक अग्रणी फैशन पत्रकार, मेहर कास्टेलिनो का बुधवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके परिवार में बेटा कार्ल, बहू निशा और बेटी क्रिस्टीना हैं. मुंबई में जन्मी मेहर पहली बार तब चर्चा में आईं जब उन्होंने 1964 में 'फेमिना मिस इंडिया' का खिताब जीता. उन्होंने मिस यूनिवर्स और मिस यूनाइटेड नेशंस सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया. उनके इस सफर ने आगे चलकर कई भारतीय सुंदरियों के लिए रास्ता तैयार किया.
फेमिना मिस इंडिया ऑर्गनाइजेशन ने खबर की पुष्टि की
फेमिना मिस इंडिया ऑर्गनाइजेशन ने एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस खबर की पुष्टि की है. उन्होंने लिखा, “अत्यंत दुख के साथ, हम फेमिना मिस इंडिया 1964 और भारत की पहली फेमिना मिस इंडिया, मेहर कास्टेलिनो के निधन पर शोक व्यक्त करते हैं. एक सच्ची पथप्रदर्शक के रूप में, उन्होंने नए रास्ते खोले, स्टैण्डर्ड सेट किए और आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं के लिए निडर होकर सपने देखने की नींव रखी. वे वाकई में एक मिसाल थीं; उनकी विरासत उन यात्राओं और सपनों के माध्यम से जीवित रहेगी जिन्हें उन्होंने संभव बनाया. उनके परिवार, मित्रों और प्रियजनों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदनाएं. उनकी आत्मा को शांति मिले और उनकी विरासत हमेशा चमकती रहे.
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उन्होंने आगे कहा, “हमारी दिवंगत फेमिना मिस इंडिया 1964, मेहर कास्टेलिनो सादगी और गरिमा की मिसाल थीं. एक सच्चे पथप्रदर्शक के रूप में उन्होंने न केवल फैशन जगत में अपनी पहचान बनाई बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए रास्ता भी तैयार किया जो आज इस मंच पर खड़ी हैं. उनकी शख्सियत ने शालीनता की नई परिभाषा दी, और उनका सफर अनगिनत सपनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना. उनकी विरासत उन मूल्यों के जरिए हमेशा जीवित रहेगी जिनके लिए वे खड़ी रहीं. हम मेहर जी द्वारा सिखाए गए शालीन व्यवहार, हिम्मत और सदाबहार गरिमा को अपने हर काम में अपनाकर उन्हें सम्मान देते हैं."
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मेहर का फैशन जर्नलिज्म का सफर
मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद मेहर ने पत्रकारिता को अपना करियर बनाया. उन्होंने 1973 में 'ईव्स वीकली' (Eve’s Weekly) में अपना पहला आर्टिकल लिखकर इसकी शुरुआत की. धीरे-धीरे वे एक फुल-टाइम फैशन जर्नलिस्ट बन गईं और उनके लेख कई बड़े अखबारों में एक साथ छपने लगे. अपने पूरे करियर के दौरान उनके लेख लगभग 160 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय अखबारों और मैग्जीन में छपे. इसी वजह से उन्हें फैशन और लाइफस्टाइल रिपोर्टिंग की दुनिया की उन्हें सबसे सम्मानित और भरोसेमंद जर्नलिस्ट माना जाता है.
मेहर कास्टेलिनो ने फैशन पर कई किताबें भी लिखीं, जिनमें मैनस्टाइल, फैशन कैलाइडोस्कोप और फैशन म्यूज़िंग्स प्रमुख हैं. इन किताबों में उन्होंने फैशन के बदलते दौर, स्टाइल और इस इंडस्ट्री के विकास के बारे में विस्तार से बताया. इसके अलावा, उन्होंने लैक्मे फैशन वीक और अन्य बड़े फैशन शो के लिए 'आधिकारिक फैशन राइटर' के रूप में भी काम किया. अपनी गहरी समझ और अनुभव के कारण उन्हें बड़े फैशन संस्थानों और इंडस्ट्री अवार्ड्स में अक्सर जज और स्पीकर के तौर पर आमंत्रित किया जाता था.
मेहर कास्टेलिनो को इस बात के लिए जाना जाता है कि उन्होंने फैशन को केवल ग्लैमर या चकाचौंध के रूप में नहीं, बल्कि एक गंभीर उद्योग सीरियस इंडस्ट्री के रूप में पहचान दिलाई. उन्होंने क्राफ्टमैनशिप , ब्रांडिंग और कंस्यूमर ट्रेंड्स जैसे विषयों पर बहुत ही गहराई से लेख लिखे. उन्होंने नए डिजाइनरों और लेखकों को भी आगे बढ़ने में मदद की (मेंटॉर किया) और वे फैशन संस्थानों और जूरी पैनलों का हिस्सा रहीं. उनके लेखों को उनके हिस्टोरिकल इनसाइट और डेप्थ के लिए बहुत पसंद किया जाता था. उन्होंने बहुत करीब से देखा और लिखा कि कैसे भारतीय फैशन छोटे बुटीक से निकलकर दुनिया के बड़े रैंप तक पहुँचा.
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मेहर कास्टेलिनो की विरासत और प्रभाव
भारत में फैशन पत्रकारिता के क्षेत्र में मेहर कास्टेलिनो का योगदान महत्वपूर्ण रहा है. उन्होंने फैशन को लेकर लोगों की समझ को बदलने और उसे बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. उन्होंने इतिहास की जानकारी को आज के नए दौर के ट्रेंड्स के साथ बहुत खूबसूरती से जोड़कर पेश किया. उनकी विरासत आज भी उन अनगिनत लेखकों, डिजाइनरों और फैशन प्रोफेशनल्स के जरिए जीवित है, जिन्हें उन्होंने दशकों तक प्रेरित किया और सही रास्ता दिखाया.
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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