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Travel Alert: 2026 से बदल रहे हैं विदेश यात्रा के नियम; इन एशियाई देशों में एंट्री होगी मुश्किल

2026 से जापान, सिंगापुर, कोरिया और भूटान टूरिज्म नियम सख्त कर रहे हैं. ओवरटूरिज्म और सुरक्षा के लिए अब ज्यादा टैक्स, कड़ी डॉक्यूमेंट जांच और नई एंट्री प्रणाली लागू होगी. यात्रियों को अब बढ़ते खर्च और सख्त एयरपोर्ट नियमों के लिए तैयार रहना चाहिए.

2026 से जापान, सिंगापुर, कोरिया और भूटान टूरिज्म नियम सख्त कर रहे हैं. ओवरटूरिज्म और सुरक्षा के लिए अब ज्यादा टैक्स, कड़ी डॉक्यूमेंट जांच और नई एंट्री प्रणाली लागू होगी. यात्रियों को अब बढ़ते खर्च और सख्त एयरपोर्ट नियमों के लिए तैयार रहना चाहिए.

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FE Hindi Desk
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Asian countries new entry requirements

ओवरटूरिज्म और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एशिया के प्रमुख देशों ने पर्यटन नियम कड़े किए. Photograph: (Freepik)

कोरोना के बाद जैसे-जैसे लोग फिर से विदेशों की यात्रा करने लगे हैं, एशिया के कई देश अपने एंट्री नियमों और टूरिज्म पॉलिसी में बदलाव कर रहे हैं. पर्यटकों की भीड़ को संभालने और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए अब जापान ने भी सिंगापुर, साउथ कोरिया और भूटान की तरह नए नियम लागू किए हैं. इन बदलावों का मतलब यात्रियों को रोकना नहीं है. सरकारों का कहना है कि टूरिस्टों की भारी भीड़ को मैनेज करने, सुविधाओं पर पड़ने वाले बोझ को कम करने और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए ये कदम उठाना बहुत ज़रूरी है.

जापान यात्रा अब होगी महंगी: नए टूरिस्ट टैक्स की तैयारी

दुनियाभर के सैलानियों की पहली पसंद रहने वाला जापान, 2026 से अपने नियमों में बड़े बदलाव करने जा रहा है. अब क्योटो, सपोरो और सेंडाई जैसे पॉपुलर शहरों में घूमना थोड़ा महंगा हो जाएगा क्योंकि वहां नया'टूरिस्ट टैक्स' लागू होने वाला है. इसके साथ ही, जापान सरकार यात्रियों की सुरक्षा और उनके शॉपिंग के तरीकों पर नज़र रखने के लिए सिस्टम को और भी सख्त बना रही है.

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शॉपिंग के नियमों में बड़ा बदलाव

एक बड़ा बदलाव जापान में टैक्स-फ्री शॉपिंग को लेकर होने वाला है. नवंबर 2026 से विदेशी सैलानियों को दुकान पर सामान खरीदते समय टैक्स में तुरंत छूट नहीं मिलेगी. इसके बजाय यात्रियों को खरीदारी करते समय पूरा पैसा देना होगा और फिर देश छोड़ने से पहले एयरपोर्ट काउंटर पर अपना रिफंड लेना होगा. अधिकारियों का कहना है कि यह कदम शॉपिंग सिस्टम में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने और नियमों का सही से पालन करवाने के लिए उठाया जा रहा है.

जापान छोड़ना भी होगा महंगा और सुरक्षा जांच होगी सख्त

जापान अपना 'डिपार्चर टैक्स' भी बढ़ाने की योजना बना रहा है. इसे 1,000 येन से बढ़ाकर 3,000 येन (लगभग ₹1,700) कर दिया जाएगा. यह पैसा आपकी फ्लाइट या क्रूज की टिकट में ही जुड़ा होगा. इस पैसे का इस्तेमाल टूरिस्टों की भीड़ को मैनेज करने, जगह-जगह अलग-अलग भाषाओं में साइनबोर्ड लगाने और पर्यटन की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा.

जापान, सिंगापुर की तरह फ्लाइट में बैठने से पहले कोई पाबंदी तो नहीं लगा रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे सैलानियों की संख्या बढ़ रही है, अब यात्रियों के डेटा और कागजातों (Documents) की जांच पहले से कहीं ज्यादा कड़ी और आम हो जाएगी.

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सिंगापुर: बोर्डिंग से पहले ही यात्रियों को रोका जाएगा

सिंगापुर ने अपनी सीमा सुरक्षा को लेकर सबसे कड़ा रुख अपनाया है. 30 जनवरी 2026 से, यह देश एक 'नो-बोर्डिंग डायरेक्टिव' सिस्टम लागू करने जा रहा है. इस नियम के तहत, वहां की इमिग्रेशन अथॉरिटी एयरलाइंस को उन यात्रियों को विमान में बैठाने से मना करने का आदेश दे सकती है जो अयोग्य हैं, जिनके पास सही वीजा नहीं है या जो पासपोर्ट की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं.

फिलहाल, ऐसे यात्रियों की पहचान अक्सर सिंगापुर पहुंचने के बाद होती है. लेकिन यह नया तरीका उन्हें फ्लाइट में चढ़ने से ही रोक देगा. अगर एयरलाइंस इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही, अगर स्टाफ जानते हुए भी प्रतिबंधित यात्रियों को बोर्ड करने देता है, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

सिंगापुर के अधिकारियों का कहना है कि उनका लक्ष्य सुरक्षा खतरों को देश की सीमा के अंदर आने से पहले ही रोकना है, न कि इमिग्रेशन काउंटर पर उनसे निपटना.

दक्षिण कोरिया: एंट्री में राहत, लेकिन शर्तों के साथ

दक्षिण कोरिया ने एक संतुलित रास्ता अपनाया है. अपनी सख्त डिजिटल जांच प्रणाली को बनाए रखते हुए सरकार ने 67 देशों के यात्रियों के लिए K-ETA (कोरिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन) से मिलने वाली छूट को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है.

यात्री अब भी अपनी मर्जी से K-ETA के लिए आवेदन कर सकते हैं ताकि उन्हें एयरपोर्ट पर एंट्री जल्दी मिल सके, लेकिन इसके लिए आवेदन शुल्क देना होगा. अधिकारियों ने संकेत दिया है कि हालांकि अभी एंट्री में राहत दी गई है, लेकिन भविष्य में डिजिटल परमिशन और निगरानी की भूमिका और भी बड़ी होगी.

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भूटान: सख्त लेकिन स्पष्ट नियम जारी

एशिया के सबसे संभलकर चलने वाले पर्यटन स्थलों में से एक, भूटान का एक खास नियम है. यहां आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को 100 अमेरिकी डॉलरपर नाईट का 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट शुल्क' (SDF) देना पड़ता है.

यह फीस पर्यटकों की संख्या को सीमित रखने में मदद करती है और इससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण की रक्षा और संस्कृति को बचाने के लिए किया जाता है. अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल सुनिश्चित करता है कि पर्यटन का लाभ स्थानीय समुदायों को मिले और भूटान की नाजुक प्रकृति और विरासत भी सुरक्षित रहे.

एशियाई देश नियमों को सख्त क्यों बना रहे हैं?

महामारी के बाद अचानक बढ़ी यात्रियों की भीड़ अपने साथ नई चुनौतियां लेकर आई है. मशहूर शहर पर्यटकों की भारी भीड़ से जूझ रहे हैं, जिससे वहां रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए महंगाई बढ़ रही है और बसों, ट्रेनों जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है.

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यात्रियों को क्या करना चाहिए?

जो लोग 2026 के बाद जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया या भूटान जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब ज्यादा खर्च, दस्तावेजों (Documents) की कड़ी जांच और एयरपोर्ट पर नई प्रक्रियाओं के लिए तैयार रहना चाहिए.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

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