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क्या आप ठंड और प्रदूषण को अपनी सेहत के प्रति लापरवाही का बहाना बना रहे हैं? Photograph: (Gemini Ai)
जैसे-जैसे सर्दी अपना रंग दिखाने लगती है, वैसे-वैसे मौसम का मिज़ाज भी बदल जाता है. सुबह की शुरुआत अब सूरज की किरणों से नहीं, बल्कि कोहरे की सफ़ेद चादर से होती है. ठंडी हवा, धुंधली सड़कें और सिहरन भरी सुबह ऐसे में रज़ाई छोड़कर बाहर निकलने का मन भला किसका करता है? ऊपर से कोहरे के कारण प्रदूषण का स्तर भी खतरनाक हद तक पहुँच जाता है, नतीजा यह कि मॉर्निंग वॉक और ईवनिंग वॉक दोनों पर जैसे ताला लग जाता है.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. सर्द मौसम का एक और रंग है—ज़ायके का रंग. सर्दी आते ही ज़ुबान खुद-ब-खुद चलने लगती है. गरमागरम चाय के साथ पकौड़े, तरह-तरह के पराठे, गजक, मूंगफली, रेवड़ी—और न जाने क्या-क्या हमारे दिल को ललचाता रहता है. ठंड में भूख भी कुछ ज़्यादा ही लगती है और “थोड़ा-सा” खाते-खाते कब वजन बढ़ने लगता है, इसका एहसास तब होता है जब कपड़े तंग पड़ने लगते हैं.
यहीं से एक अहम सवाल उठता है—आख़िर करें तो क्या करें? क्या सर्दी का मतलब यह है कि हम अपनी सेहत को छुट्टी पर भेज दें? बिल्कुल नहीं.
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घर को ही बनाएं अपना 'जिम'
अगर प्रदूषण और कोहरे की वजह से बाहर जाना सेहत के लिए जोखिम भरा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि हम फिजिकल एक्सरसाइज बंद कर दें. घर की चारदीवारी के भीतर भी हम खुद को फिट रख सकते हैं. डॉक्टर्स और फिटनेस एक्सपर्ट्स कुछ बेहतरीन इनडोर विकल्पों का सुझाव देते हैं:
सूर्य नमस्कार और योग: सर्दियों में हमारा मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है. लगातार सूर्य नमस्कार करने से बॉडी में इंटरनल हीट पैदा होती है. यह न केवल कड़कड़ाती ठंड से लड़ने में मदद करता है, बल्कि डाइजेशन को भी दुरुस्त रखता है, जिससे सर्दी के भारी खान-पान को पचाना आसान हो जाता है. सूर्य नमस्कार हमारी बॉडी को फ्लेक्सिबल भी बनाए रखता है. 10-12 राउंड सूर्य नमस्कार के करने से पूरी बॉडी की एक्सरसाइज हो जाती है.
स्पॉट जॉगिंग और हाई-नीज़: स्पॉट जॉगिंग और हाई-नीज़ सर्दियों में घर के अंदर किए जाने वाले सबसे प्रभावी कार्डियो व्यायामों में से हैं. चूँकि बाहर प्रदूषण और कोहरा है, ये दो व्यायाम आपके शरीर को 'फैट बर्निंग मोड' में लाने के लिए पर्याप्त हैं. 15 मिनट की लगातार स्पॉट जॉगिंग लगभग 100-150 कैलोरी जला सकती है. यह शरीर का टेम्परेचर तुरंत बढ़ाती है, जिससे ठंड के कारण होने वाली सुस्ती दूर होती है. यह एक बेहतरीन कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज है जो ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखती है और कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है. हाई-नीज़ आपके 'लोअर एब्स' और 'कोर' मसल्स पर काम करता है. सर्दियों में पेट के पास जमने वाली चर्बी को कम करने के लिए यह सबसे तेज़ तरीका है.
स्ट्रेचिंग और प्लैंक: सर्दियों में मसल्स की स्टिफनेस से बचने के लिए स्ट्रेचिंग और प्लैंक का कॉम्बिनेशन एक रामबाण इलाज है. जब हम ठंड में कम हिलते-डुलते हैं, तो हमारी वेंस और मसल्स सिकुड़ने लगती हैं, जिससे बदन दर्द की शिकायत होती है. ऐसे में 'डायनेमिक स्ट्रेचिंग' (जैसे गर्दन, कंधों और कमर को घुमाना) बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखती है और फेक्सिबिलिटी लाती है. वहीं दूसरी ओर, प्लैंक एक ऐसा 'आइसोमेट्रिक' व्यायाम है जो बिना कूदे-फाँदे आपके पूरे शरीर को सक्रिय कर देता है. केवल 30 से 60 सेकंड का प्लैंक आपके पेट (Core), पीठ और कंधों की मसल्स पर गहरा दबाव डालता है, जिससे शरीर के भीतर हीट पैदा होती है. यह न केवल सर्दियों में बढ़ने वाले पेट के घेरे को कंट्रोल करता है, बल्कि आपके शरीर के 'पोस्चर' को भी सुधारता है, जो अक्सर रज़ाई में घंटों लेटे रहने से बिगड़ जाता है.
प्राणायाम: सर्दियों में जब कोहरा और प्रदूषण मिलकर 'स्मॉग' बन जाते हैं, तो हमारे लंग्स पर दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में प्राणायाम न केवल एक एक्सरसाइज की तरह, बल्कि हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम के लिए एक सुरक्षा कवच (Shield) की तरह काम करता है. इसमें आप कपालभाति और अनुलोम-विलोम कर सकते हैं. अनुलोम-विलोम लंग्स के हर कोने तक ऑक्सीजन पहुँचाता है, जिससे ब्लड शुद्ध होता है और प्रदूषण के कणों का प्रभाव कम होता है. कपालभाति एक 'शुद्धि क्रिया' है जो शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करती है. क्योंकि बाहर प्रदूषण अधिक है, इसलिए घर के अंदर बैठकर कपालभाति और अनुलोम-विलोम करना फेफड़ों को मज़बूत बनाने में मदद करता है.
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खानपान में संतुलन सबसे ज़रूरी
सर्दी में गरम चीज़ें खाना बुरा नहीं है, लेकिन अति हर जगह नुकसान करती है. तली-भुनी चीज़ों की जगह उबली सब्ज़ियाँ, सूप, दलिया, खिचड़ी और ड्राई फ्रूट्स को सीमित मात्रा में शामिल करें. मूंगफली, तिल और गुड़ जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ सही मात्रा में शरीर को ऊर्जा देते हैं.
पानी पीना न भूलें
ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को पानी उतना ही चाहिए जितना गर्मियों में. गुनगुना पानी पाचन को बेहतर रखता है और वजन बढ़ने से भी बचाता है.
नींद और दिनचर्या पर ध्यान दें
सर्दी में देर तक सोना अच्छा लगता है, लेकिन अनियमित दिनचर्या सुस्ती बढ़ाती है. समय पर सोना और उठना सेहत के लिए बेहद जरूरी है. डॉक्टर्स कहते हैं कि सेहत कोई मौसम देखकर साथ नहीं देती. अगर हम साल भर लापरवाही करेंगे और सिर्फ़ परेशानी होने पर जागेंगे, तो नुकसान तय है.
आख़िर में यही कहा जा सकता है कि सर्दी का मौसम खुद को समेटने का नहीं, बल्कि खुद का ख्याल रखने का मौसम है. याद रखिए सेहत कोई क़िस्मत का खेल नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे-छोटे फैसलों का नतीजा होती है. अगर आज हमने सावधानी नहीं बरती, तो आने वाले दिनों में इसका खामियाज़ा ख़राब सेहत के रूप में चुकाना पड़ सकता है. सर्दी का मज़ा लीजिए, लेकिन समझदारी और सक्रियता के साथ.
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