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न्यूज़ीलैंड में भारतीय नर्स नितिन मंकील के 5 वर्षीय ऑटिस्टिक बेटे का वीजा खारिज होने से परिवार सदमे में है.
न्यूजीलैंड (New Zealand) में रहने वाले भारतीय मूल के एक हेल्थकेयर वर्कर को एक बेहद भावुक और कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. उनके पांच साल के बेटे, जो ऑटिज्म (Autism) से ग्रसित है, का वीजा न्यूजीलैंड के इमीग्रेशनअधिकारियों ने 'हेल्थ ग्राउंड्स' पर खारिज कर दिया है.
भारत से जनवरी 2024 में न्यूज़ीलैंड आए एल्डर केयर नर्स (बुजुर्गों की देखभाल करने वाले नर्स) नितिन मंकील को यह पता चला कि ऑटिज़्म डायग्नोस होने के कारण उनके बेटे एधान को कानूनी रूप से देश में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती. मंकील की पत्नी अपर्णा जयनंदन गीता और उनका बेटा साल के आखिर में 'स्ट्रेट-टू-रेसिडेंस' पाथवे के तहत आवेदन किए जाने के बाद उनके पास न्यूजीलैंड आए थे.
बच्चे की सेहत के कारण वीज़ा आवेदन में अड़चन
नितिन मंकील का पेशा न्यूजीलैंड की 'ग्रीन लिस्ट' के टियर 1 में आता है, जिसके तहत उन्हें 'स्ट्रेट-टू-रेसिडेंस' के लिए आवेदन करने का अधिकार मिला. नितिन ने अपनी पत्नी और बेटे को अपने आवेदन में 'सेकेंडरी एप्लीकेंट' के रूप में जोड़ा था. जांच के दौरान,इमीग्रेशन अधिकारियों ने एधान को ऑटिज्म (Autism Spectrum Disorder) और ग्लोबल डेवलपमेंटल डिले से ग्रसित पाया. अधिकारियों ने नितिन को सूचित किया और एधान के स्पीच डेवेलपमेंट में देरी से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी.
आरएनज़ेड (RNZ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, परिवार को बताया गया कि यदि एधान का नाम आवेदन से हटाकर किसी अन्य वीज़ा श्रेणी के तहत अलग से आवेदन नहीं किया गया तो सभी वीज़ा आवेदन खारिज कर दिए जाएंगे. मंकील ने इस निर्देश का पालन किया, जिसके बाद उनके और उनकी पत्नी के वीज़ा मंज़ूर हो गए लेकिन उनके बेटे का वीज़ा स्वीकृत नहीं हुआ. इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि बच्चे को देश से डिपोर्ट किया जा सकता है.
मंकील ने कहा, “मैं वास्तव में बहुत गहरे सदमे में था.”
उन्होंने कहा, “यह सचमुच दिल दहला देने वाला है. मुझे नहीं पता कि अगर ऐसा होता है, तो मैं मानसिक रूप से इसका सामना कैसे कर पाऊंगा.”
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इमीग्रेशन रूल्स में स्वास्थ्य मानदंडों पर कोई छूट नहीं
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इमिग्रेशन न्यूज़ीलैंड (INZ) की डिप्टी चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जीनी मेलविल ने कहा कि जिन आवेदकों को स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर भारी खर्च डालने की संभावना वाला माना जाता है, उन्हें किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा सकती.
उन्होंने कहा, “हम श्री मंकील और उनके परिवार की चुनौतियों को समझते हैं, लेकिन इमिग्रेशन से जुड़े स्वास्थ्य मानदंड बहुत स्पष्ट और सख्त हैं, और इनमें केवल मंत्रीस्तरीय हस्तक्षेप के माध्यम से ही छूट दी जा सकती है. श्री मंकील और उनकी पत्नी को 'ग्रीन लिस्ट' टियर 1 के तहत रेजिडेंसी इसलिए दी गई क्योंकि न्यूजीलैंड को स्वास्थ्य पेशेवरों (Healthcare professionals) की "अत्यधिक आवश्यकता" है. लेकिन सभी सेकेंडरी ऍप्लिकैंट्स को भी अपने वीज़ा श्रेणी के अनुसार स्वास्थ्य मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य है.”
परिवार का कहना है कि भारत लौटना संभव नहीं
मंकील ने कहा कि परिवार के लिए अब भारत लौटना संभव नहीं है, क्योंकि उन्होंने और उनकी पत्नी ने न्यूज़ीलैंड में रजिस्ट्रेशन पाने के बाद वहां अपने पेशेवर लाइसेंस छोड़ दिए थे.
उन्होंने कहा, “मेरे पास भारत में कोई प्रैक्टिस करने का लाइसेंस नहीं है क्योंकि हमने उसे रद्द कर दिया और यहां रजिस्ट्रेशन ले लिया. हमने सब कुछ छोड़ दिया और यहां आ गए.”
उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने परिवार पर इमोशनल दबाव डाल दिया है, हालांकि उन्हें लोकल कम्युनिटीज से काफी समर्थन मिल रहा है.
उन्होंने कहा, “हम डर के बीच जी रहे हैं, लेकिन मुझे कई अलग-अलग कम्युनिटीज से बहुत समर्थन मिल रहा है.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं दिन-ब-दिन कमजोर हो रहा हूं, लेकिन इन सबका सपोर्ट मुझे आगे बढ़ने की ताकत दे रहा है. हम बस दुआ कर रहे हैं और अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं.”
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Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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