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Diabetes Kidney Disease Symptoms: किडनी को बचाना है तो डायबिटीज़ में इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

Diabetes mein Kidney Kharab Hone Ke Lakshan: डायबिटीज़ में किडनी नुकसान के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं और अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं. नियमित जांच, शुगर व ब्लड प्रेशर नियंत्रण और समय पर इलाज से किडनी फेल्योर की गति धीमी की जा सकती है या रोकी जा सकती है.

Diabetes mein Kidney Kharab Hone Ke Lakshan: डायबिटीज़ में किडनी नुकसान के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं और अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं. नियमित जांच, शुगर व ब्लड प्रेशर नियंत्रण और समय पर इलाज से किडनी फेल्योर की गति धीमी की जा सकती है या रोकी जा सकती है.

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FE Hindi Desk
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Diabetes Mein Kidney Kaise Safe Rakhen

Kidney Failure Signs in Diabetic Patients: क्या आप चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर रहे हैं? Photograph: (pexels, wikimedia commons)

 Diabetes Patients Mein Kidney Failure Signs: मधुमेह यानी डायबिटीज से पीड़ित लोगों में किडनी की बीमारी सबसे कॉमन कॉम्प्लीकेशंन में से एक है. दुर्भाग्य से, अधिकांश रोगी इसके शुरुआती संकेतों को पहचान नहीं पाते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि किडनी डैमेज की शुरुआत किसी गंभीर लक्षण के साथ नहीं होती है. बैंगलोर के एस्टर आरवी अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट - नेफ्रोलॉजी और ट्रांसप्लांट फिजिशियन, डॉ. हर्ष कुमार एच एन बताते हैं, "किडनी की बीमारी के शुरुआती स्टेजेस में लक्षण आमतौर पर या तो बहुत कम होते या साफ़ नजर नहीं आते हैं, जैसे कि हल्की सूजन, सामान्य थकान, या प्रोटीन के रिसाव के कारण यूरिन में झाग आना." 

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किडनी डिजीज के सिंपटम्स

डॉ. कुमार के अनुसार, शरीर में फ्लूइड रिटेंशन (fluid retention) अक्सर पहला बड़ा संकेत होता है. वे कहते हैं, "जब आपकी किडनी अतिरिक्त फ्लूइड को बाहर नहीं निकाल पाती है, तो यह शरीर में जमा होने लगता है. आपके पैरों या आंखों के आसपास हल्की सूजन किडनी की क्षति का एक शुरुआती संकेत है."

यूरिन के जरिए भी कई सुराग मिलते हैं. डॉ. कुमार बताते हैं, "झागदार या बुलबुले वाला यूरिन आने का मतलब है कि किडनी से प्रोटीन का रिसाव हो रहा है. रात में बार-बार यूरिन आना, गहरे या चाय के रंग का यूरिन, या यूरिन की मात्रा कम हो जाने को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. यदि आप ये लक्षण देखते हैं, तो स्थिति बिगड़ने से पहले किडनी विशेषज्ञ (नेफ्रोलॉजिस्ट) से सलाह लें."

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लगातार थकान, कमजोरी या पीठ के निचले हिस्से में भारीपन महसूस होना भी किडनी पर शुरुआती दबाव का संकेत दे सकता है. डॉ. कुमार ने indianexpress.com को बताया, "यहाँ तक कि अगर ब्लड प्रेशर थोड़ा भी बढ़ रहा है, तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि किडनी इसे नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है."

लेकिन कोई यह कैसे सुनिश्चित कर सकता है कि मधुमेह (डायबिटीज) ने अब किडनी को प्रभावित करना शुरू कर दिया है? डॉ. कुमार नियमित जांच (स्क्रीनिंग) के महत्व पर जोर देते हैं.

वे कहते हैं, "यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेश्यो (UACR) अक्सर किडनी डैमेज का सबसे शुरुआती इंडिकेटर होता है. इसके अलावा, eGFR ब्लड टेस्ट हमें यह बताता है कि किडनी कचरे (waste) को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है. हर डायबिटिक को साल में कम से कम एक बार ये दोनों टेस्ट जरूर करवाने चाहिए." ब्लड प्रेशर की निगरानी करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि "हाई बीपी किडनी की बीमारी का कारण भी बनता है और उसे बदतर भी बनाता है."

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शुरुआती लक्षण और एडवांस किडनी फेल्योर में अंतर

कई शुरुआती लक्षण ऐसे महसूस नहीं होते कि वे "किडनी से संबंधित" हैं, यही कारण है कि मरीज उन्हें पहचान नहीं पाते. डॉ. कुमार कहते हैं, "भूख कम लगना, मुंह में मैटेलिक टेस्ट आना, स्किन में बदलाव, नींद आने में परेशानी या सुबह के समय बिना किसी कारण के जी मिचलाना, ये सभी किडनी फंक्शन के ख़राब होने से जुड़े हो सकते हैं."

वे इस बात पर जोर देते हैं कि लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि बढ़ती थकान डायबिटीज के कारण है, जबकि वास्तव में इसका कारण किडनी की कमजोरी हो सकती है.

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मधुमेह के रोगियों को साल में कम से कम एक बार ब्लड क्रिएटिनिन-आधारित eGFR टेस्ट करवाने की आवश्यकता होती है. (photo: pexels)

हालांकि, हल्के नुकसान से गंभीर फेल्योर तक का बदलाव स्पष्ट होता है. जहां शुरुआती चरण की किडनी बीमारी में लक्षण कम होते हैं, वहीं जब किडनी फंक्शन्स और खराब हो जाते हैं, तो रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित होने लगती है. डॉ. कुमार बताते हैं, “गंभीर किडनी फेल्योर में सूजन बढ़ना, मतली या वॉमिटिंग, सांस की तकलीफ़, लगातार खुजली, मांसपेशियों में ऐंठन, भूख में कमी और बढ़ता ब्लड प्रेशर देखा जाता है.” वह आगे कहते हैं कि टॉक्सिंस का जमाव मस्तिष्क पर भी असर डाल सकता है. एडवांस स्टेज में कंफ्यूजन या कंसंट्रेशन बनाने में कठिनाई दिखाई दे सकती है.”

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डॉ. कुमार स्पष्ट करते हैं कि किडनी फंक्शंस में गिरावट की कोई एक निश्चित टाइमलाइन नहीं होती है. कई डायबिटिक पेशेंट्स के लिए, किडनी में गिरावट वर्षों के दौरान धीरे-धीरे होती है. हालाँकि, एक बार जब लक्षण दिखाई देने लगते हैं तो स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है.

वे कहते हैं, "यदि सूजन, सांस फूलना या भूख न लगने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो जब तक इनको तुरंत मैनेज न किया जाए, हालत तेजी से खराब हो सकती है."  

वे कहते हैं अच्छी खबर यह है कि समय पर पहचान होने से बहुत बड़ा अंतर लाया जा सकता है. नेफ्रोलॉजिस्ट अपनी बात समाप्त करते हुए कहते हैं, "शुगर पर सख्त नियंत्रण, ब्लड प्रेशर पर काबू और समय पर इलाज से बीमारी की प्रोग्रेस को काफी धीमा किया जा सकता है या इसे बढ़ने से पूरी तरह रोका भी जा सकता है."

डिसक्लेमर: यह लेख सार्वजनिक डोमेन से प्राप्त जानकारी और/या उन विशेषज्ञों के साथ की गई बातचीत पर आधारित है जिनसे हमने संपर्क किया है. कोई भी दिनचर्या (रूटीन) शुरू करने से पहले हमेशा अपने स्वास्थ्य चिकित्सक या डॉक्टर से परामर्श लें.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
To read this article in English, click here.
Source: The Indian Express

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