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"भारत लौटना पीछे हटना नहीं, खुद के करीब आना है": भारत वापसी पर ज़ील शाह के दिल छू लेने वाले विचार

कनाडा से 10 साल बाद भारत लौटीं ज़ील शाह के अनुसार, यह बदलाव केवल पते का नहीं बल्कि नजरिए का है. उन्होंने प्रोडक्टिविटी के बजाय अपनेपन, अकेलेपन के बजाय अपनों का साथ और मशीनी जीवन के बजाय मानवीय अनुभवों को चुना.

कनाडा से 10 साल बाद भारत लौटीं ज़ील शाह के अनुसार, यह बदलाव केवल पते का नहीं बल्कि नजरिए का है. उन्होंने प्रोडक्टिविटी के बजाय अपनेपन, अकेलेपन के बजाय अपनों का साथ और मशीनी जीवन के बजाय मानवीय अनुभवों को चुना.

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Aditi Shivi
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Moving Back to India

क्या भारत लौटना पीछे हटना है? NRI मॉम ब्लॉगर ज़ील शाह का ये जवाब बदल देगा आपका नजरिया.

विदेश में कुछ साल बिताने के बाद भारत लौटने के विचार को लोग अक्सर एक  समझौता, पीछे हटना या फिर ज़्यादा से ज़्यादा एक 'बदलाव' (trade-off) के रूप में देखते हैं. लेकिन कई अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए असली बदलाव सामान पैक करने से बहुत पहले ही शुरू हो जाता है. ज़ील शाह के लिए कनाडा में 10 साल बिताने के बाद भारत लौटना उनकी ज़िंदगी को उन तरीकों से बदल गया जिनका उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था.

हर वह व्यक्ति जो आज किसी चौराहे पर खड़ा है- कम्फर्ट और ग्रोथ के बीच उलझा हुआ है, उनके लिए शाह के पास एक सरल संदेश है: “आपको वह चुनने का पूरा अधिकार है जो इस समय आपके लिए सही है. जीवन की कोई तय टाइमलाइन नहीं होती. कुछ होता है तो बस आपका अपना सच.”

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विदेश में एक दशक बिताने के बाद भारत वापसी

इंस्टाग्राम पर खुद को एक 'मॉम ब्लॉगर' के रूप में पेश करने वाली शाह ने हाल ही में कनाडा से भारत लौटने पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने बताया कि वापस आना कभी भी केवल पता, स्कूल या दैनिक दिनचर्या बदलने के बारे में नहीं था. इसके बजाय, यह एक इंटरनल बदलाव था जिसने धीरे-धीरे उनके रोज़मर्रा के जीवन को देखने के तरीके को बदल दिया. उन्होंने लिखा, “मैं सोचती थी कि भारत लौटना सिर्फ लॉजिस्टिक्स, एड्रेस, स्कूल और रूटीन्स के बारे में होगा. मुझे इस बात का अहसास नहीं था कि यह खामोशी से मेरे जीने के तरीके को ही पूरी तरह बदल देगा."

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भारत में जीवन के तालमेल बिठाने के सफर ने कुछ अनजाने सबक सिखाए. शाह ने बताया कि अब उनके दिन जल्दबाजी से भरे नहीं होते जैसे कभी हुआ करते थे. उन्होंने आगे कहा कि यहां की ज़िंदगी शोर-शराबे, रुकावटों, बातचीत और बार-बार होने वाले चाय के ब्रेक के साथ चलती है. उन्होंने साझा किया, “ज़िंदगी यहां 'ऑप्टिमाइज्ड' (पूरी तरह व्यवस्थित) भले न हो, लेकिन इसे गहराई से महसूस किया जा सकता है.”

इस तरह जीने के अंदाज़ ने उन्हें उन आइडियाज पर सवाल उठाने के लिए भी मजबूर किया, जो उन्होंने सफलता और आत्म-सम्मान के बारे में लंबे समय से पाल रखे थे. समय के साथ, उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने अपनी काबिलियत को प्रोडक्टिविटी के साथ कितनी गहराई से जोड़ दिया था. उन्होंने स्वीकार किया, “मुझे अपनी कीमत को केवल काम और प्रोडक्टिविटी से आंकना छोड़ना पड़ा.”

शाह ने साझा किया कि उनसे अक्सर पूछा जाता है कि उन्होंने इतना बड़ा बदलाव करने का फैसला कैसे लिया और इसे कैसे स्वीकार किया. इसके जवाब में उन्होंने लिखा कि समय के साथ उनका नजरिया बदल गया है. अब खुद से यह पूछने के बजाय कि “मैं क्या खो रही हूं?”, उन्होंने यह पूछना शुरू कर दिया है कि “मैं क्या पा रही हूं?” उन्होंने इस दौर को अपने परिवार के साथ मिलकर आगे बढ़ने वाले समय के रूप में बताया. उन्होंने कहा कि एक मज़बूत सपोर्ट सिस्टम के बीच अपने बच्चे की परवरिश करने से उनके लिए एक नए तरह के  पर्सनल और इमोशनल ग्रोथ के रास्ते खुल गए हैं.

उन्होंने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा, "कभी-कभी मुझे पुरानी ज़िंदगी की याद आती है. कभी-कभी मैं इस बात के लिए शुक्रगुज़ार होती हूं कि मैंने एक अलग रास्ता चुना. लेकिन ज़्यादातर दिन मैं खुद पर फिर से भरोसा करना सीख रही हूं.” 

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अकेलेपन का अंत

परिवार और कम्युनिटी के करीब होना यह भी सिखाता है कि कंट्रोल छोड़ना कितना जरूरी है. शाह ने भारत में रहने के साथ आने वाले समझौतों के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि उन्हें यह स्वीकार करना पड़ा कि इससे प्राइवेसी कम हो जाती है, लेकिन सपोर्ट बहुत बड़ा हो जाता है. कुछ दिन उन्हें स्ट्रक्चर की कमी खलती है. कुछ दिन उन्हें साइलेंस की चाहत होती है. फिर भी, एक फीलिंग सब पर भारी रहती है  और वो ये कि अब उन्हें ऐसा नहीं लगता कि वे अपनी जिंदगी अकेले जी रही हैं.

पीछे मुड़कर देखने पर, शाह कहती हैं कि यह कदम जिंदगी को आसान नहीं बनाता. बल्कि, यह जिंदगी को उन तरीकों से रिच बनाता है जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी. उन्होंने लिखा, "वापस आने से ज़िंदगी आसान नहीं हुई. इसने जीवन को अधिक परिपूर्ण, अधिक आत्मीय और अधिक मानवीय बना दिया. और शायद यही वह बदलाव है जिसके लिए मैं सबसे ज़्यादा शुक्रगुज़ार हूं."

उनका वीडियो ऑनलाइन काफी ध्यान आकर्षित कर गया, और कई लोगों ने टिप्पणियों में अपने अनुभव साझा किए. एक यूजर ने लिखा कि यही अपनी ही देश में रहने की खूबसूरती है — हमेशा आपकी देखभाल होती है. दूसरे ने कहा कि भारत लौटने के बाद उन्हें भी ऐसा ही महसूस हुआ.

(इस लेख की सामग्री एक वायरल सोशल मीडिया चर्चा पर आधारित है और केवल जानकारी और मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है.)

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

To read this article in English, click here.

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