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कहीं आप भी तो ये गलती नहीं कर रहे वरना किडनी हो जाएगी बर्बाद

पैंटोप्राज़ोल जैसी गैस की दवाएँ सही वजह और सीमित समय के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के लेने से किडनी को नुकसान हो सकता है. बार-बार एसिडिटी होने पर जीवनशैली सुधारें और ज़रूरत पड़े तो जाँच कराएँ.

पैंटोप्राज़ोल जैसी गैस की दवाएँ सही वजह और सीमित समय के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के लेने से किडनी को नुकसान हो सकता है. बार-बार एसिडिटी होने पर जीवनशैली सुधारें और ज़रूरत पड़े तो जाँच कराएँ.

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FE Hindi Desk
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pantoprazole can harm kidneys

बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना खतरनाक हो सकता है. Photograph (Canva)

कई लोग सोचते हैं कि गैस या अपच (indigestion) की दवाएं जिनमें पैंटोप्राजोल एक कॉमन इंग्रेडिएंट है बिना डॉक्टर से पूछे खाने में कोई नुकसान नहीं है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ये दवाइया तुरंत राहत तो देती है, लेकिन इन्हे लंबे समय तक लेने से किडनी पर स्ट्रेस पड़ सकता है. केआईएमएस हॉस्पिटल्स, ठाणे में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के सलाहकार, डॉ. मनीष दोदमानी ने कहा, "सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई लोग इन मेडिसिंस को हानिरहित मानते हैं, जबकि वास्तव में ये शरीर पर गहरा प्रभाव डालती हैं."

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क्या पैंटोप्राज़ोल का वाकई में किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है?

डॉ. डोडमानी ने इस पर ज़ोर देते हुए कहा, 'बिलकुल.  ये मेडिसिंस किडनी पर असर डालती हैं.' उन्होंने बताया कि पैंटोप्राज़ोल उन दवाओं के समूह में आता है जो पेट में बनने वाले एसिड को कम करती हैं. डॉ. डोडमानी ने कहा “अगर इसे बिना किसी रियल मेडिकल रीज़न के हफ्तों या महीनों तक लिया जाए, तो यह किडनी में सूजन पैदा कर सकता है, जिसे इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस कहा जाता है. इस तरह की सूजन में अक्सर शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नुकसान तब तक पकड़ में नहीं आता जब तक वह गंभीर न हो जाए.”

वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मुंबई सेंट्रल के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट फिज़िशियन डॉ. निखिल भसीन ने कहा कि असली खतरा इस वजह से है कि यह सूजन अक्सर बिना किसी विज़िबल सिम्प्टम के बढ़ती है. डॉ. भसीन ने बताया, “जब तक मरीजों में सूजन, थकान या यूरिन की मात्रा कम होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक किडनी पर काफ़ी दबाव पड़ चुका होता है.” 

डॉ. भसीन ने समझाया कि किडनी पेट या लंग्स की तरह नहीं, बल्कि चुपचाप काम करती रहती है. डॉ. भसीन बताते हैं, “कई लोग यह सोचकर महीनों तक यह दवा लेते रहते हैं कि यह पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि अंदर ही अंदर किडनी की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती रहती है. आमतौर पर रूटीन ब्लड टेस्ट में यह समस्या तब सामने आती है, जब क्रिएटिनिन का स्तर पहले ही बढ़ चुका होता है.” 

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लोग रोज़ गैस की गोलियाँ लेते हुए खुद को सुरक्षित क्यों मान लेते हैं?

क्योंकि ये दवाएँ तुरंत राहत देती हैं, इसलिए कई लोगों को लगता है कि ये हल्की या बिल्कुल नुकसान नहीं करतीं हैं. डॉ. डोडमानी ने कहा, “यह एक स्ट्रांग कंपाउंड है, जो पेट के काम करने के तरीके को बदल देता है. बिना डॉक्टर की निगरानी के इसका रोज़ाना इस्तेमाल शरीर में एसिड के नेचुरल बैलेंस को बिगाड़ देता है और उन अंगों पर दबाव डालता है, जो चुपचाप अपना काम करते रहते हैं.”

कैसे पहचानें कि गैस की दवा में पैंटोप्राज़ोल मौजूद है?

इस दवा का घटक आमतौर पर पैकेट पर साफ़ तौर पर लिखा होता है. डॉ. डोडमानी ने कहा, “जो लोग नियमित रूप से एसिडिटी की गोलियाँ लेते हैं, उन्हें उसका कम्पोजीशन ज़रूर जाँचनी चाहिए. अगर उसमें पैंटोप्राज़ोल लिखा है और गोलियाँ लगातार कुछ दिनों से ली जा रही हैं, तो यह संकेत है कि दवा बंद कर दी जाए और सही मेडिकल एडवाइस ली जाए.”

क्या दवाओं का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल आपकी किडनी को नुकसान पहुँचा रहा है? (Photo: Getty Images/Thinkstock)

डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, पहले से मौजूद हल्की किडनी बीमारी वाले लोग और बुज़ुर्ग मरीजों में इसका खतरा ज़्यादा होता है. डॉ. भसीन ने कहा, “लेकिन अगर दवा का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाए, तो पूरी तरह स्वस्थ यंग एडल्ट्स में भी इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस हो सकता है.”

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तो क्या पैंटोप्राज़ोल पूरी तरह असुरक्षित है?

बिल्कुल नहीं, डॉ. डोडमानी ने स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, “जब सही वजह से और सही अवधि के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है, तो यह दवा बहुत अच्छा वर्क करती है. समस्या तब शुरू होती है, जब लोग इसकी स्ट्रेंथ को समझे बिना इसे रोज़मर्रा की आदत बना लेते हैं. बात साफ़ है लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय निगरानी के इसका इस्तेमाल किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है, और इन गोलियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए.”

अगर एसिडिटी बार-बार लौटती रहे तो लोग क्या कर सकते हैं?

छोटी-छोटी आदतें बड़ा फर्क ला सकती हैं. समय पर खाना खाना, तले-भुने और मसालेदार भोजन को कम करना, चाय-कॉफी की मात्रा घटाना, देर रात स्नैकिंग से बचना और तनाव को नियंत्रित करना शुरुआती कदम हैं. डॉ. डोडमानी ने कहा, “बिना सलाह के लंबे समय तक दवाएँ लेने की बजाय ये उपाय अक्सर एसिडिटी को कहीं बेहतर तरीके से शांत करते हैं. अगर फिर भी परेशानी बनी रहे, तो महीनों तक गोलियाँ खाते रहने के बजाय जाँच करवाना बेहतर है.”

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डिस्क्लेमर : यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और/या जिन विशेषज्ञों से हमने बात की है, उनकी जानकारी पर आधारित है. किसी भी नियमित उपचार या दवा को शुरू करने से पहले हमेशा अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
To read this article in English, click here.
Source: The Indian Express

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