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स्वर्णिम आवाज़ की मालकिन सुलक्षणा पंडित- हिंदी सिनेमा की मधुर याद बन गईं. Photograph: (X)
वरिष्ठ अभिनेत्री और पार्श्वगायिका सुलक्षणा पंडित का 71 वर्ष की आयु में हृदयगति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) के कारण निधन हो गया. गुरुवार देर रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, जिसके बाद उन्हें नानावटी अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके भाई ललित पंडित ने पीटीआई से इस दुखद समाचार की पुष्टि की.
सुलक्षणा पंडित हिंदी सिनेमा की एक जानी-मानी हस्ती थीं, जिन्होंने “उलझन” और “चेहरे पे चेहरा” जैसी क्लासिक फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता. उन्होंने 1975 में फिल्मों में पदार्पण किया और जल्द ही अपनी सुरमई आवाज़ से दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो गईं. सुलक्षणा ने हिंदी के साथ-साथ बंगाली, मराठी, उड़िया और गुजराती भाषाओं में भी कई प्रसिद्ध गीत गाए और अपने समय की प्रमुख पार्श्वगायिकाओं में शुमार रहीं.
कौन थीं सुलक्षणा पंडित?
1954 में जन्मीं सुलक्षणा पंडित भारतीय फिल्म उद्योग की एक प्रतिष्ठित अभिनेत्री और पार्श्वगायिका थीं. उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत संजीव कुमार के साथ फिल्म “उलझन” से की, जिसने उन्हें तुरंत पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने अपने समय के दिग्गज सितारों जैसे राजेश खन्ना, शशि कपूर और विनोद खन्ना के साथ कई फिल्मों में काम किया.
सुलक्षणा पंडित सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक प्रतिभाशाली गायिका भी थीं. अपनी भावनात्मक और मधुर आवाज़ के कारण वे 70 और 80 के दशक में चार्टबस्टर गानों की पहचान बन गईं. वे एक संगीतमय परिवार से ताल्लुक रखती थीं. उनके चाचा पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान गायक थे, जबकि उनके भाई जतिन और ललित पंडित ने बॉलीवुड (bollywood) में प्रसिद्ध “जतिन-ललित” संगीतकार जोड़ी के रूप में ख्याति पाई. सुलक्षणा ने मात्र नौ वर्ष की उम्र में गायन शुरू कर दिया था और अपने लंबे करियर में हिंदी के अलावा कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी गाया. अपने पीछे वे अपने भाइयों जतिन, ललित और मंधीर पंडित को छोड़ गई हैं.
सुलक्षणा पंडित का फिल्मी और संगीत सफर
सुलक्षणा पंडित ने अपने करियर में अभिनय और गायन दोनों क्षेत्रों में गहरी छाप छोड़ी. उनकी कुछ उल्लेखनीय फिल्मों में संकट, हेरा फेरी, खानदान, धरम कांटा, दो वक्त की रोटी और गोरा शामिल हैं. उन्होंने 1978 में बनी बंगाली फिल्म बंदी में भी अभिनय किया था, जिसमें उनके साथ महान अभिनेता उत्तम कुमार नज़र आए थे. इस फिल्म ने उनके अभिनय के दायरे और बहुमुखी प्रतिभा को और अधिक स्पष्ट किया.
एक पार्श्वगायिका के रूप में सुलक्षणा पंडित का योगदान अमूल्य रहा है. उनकी आवाज़ में एक ऐसी मिठास और गहराई थी जिसने हर गीत को खास बना दिया. उनके गाए हुए गीत जैसे तू ही सागर तू ही किनारा, परदेसीया तेरे देश में, बेक़रार दिल टूट गया, बांधी रे काहे प्रीत, सात समुंदर पार, सोमवार को हम मिले, सोना रे तुझे कैसे मिलूं, ये प्यारा लगे तेरा चेहरा, जब आती होगी याद मेरी और ये प्यार किया है आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजते हैं.
उनके गीतों में भावनाओं की गहराई और शास्त्रीयता का सुंदर मेल देखने को मिलता है. सुलक्षणा पंडित को हमेशा एक ऐसी कलाकार के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने अपनी मधुर आवाज़ और सादगी से भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग को और भी उज्ज्वल बना दिया.
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श्रद्धांजलि
महान अभिनेत्री और गायिका सुलक्षणा पंडित के निधन के बाद सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हो गया. प्रशंसकों ने जहां उनके अमर गीतों को याद किया, वहीं कई लोगों ने उनकी फिल्मों (Films) और अभिनय को भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी. पूर्व भाजपा विधायक भारती लवेकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उन्हें याद करते हुए लिखा कि सुलक्षणा पंडित एक ऐसी “स्वर्णिम आवाज़ थीं जिन्होंने एक युग को परिभाषित किया, और उनकी गरिमामय उपस्थिति ने अनगिनत दिलों को छुआ.” उन्होंने आगे कहा कि “उनकी मधुर धुनें सदियों तक अमर रहेंगी और आने वाली पीढ़ियों तक गूंजती रहेंगी.”
प्रसिद्ध सिनेमा तकनीकी विशेषज्ञ पवन झा ने सुलक्षणा पंडित को याद करते हुए लिखा — “जीवन की मधुर उदासी ने सुलक्षणा को परिभाषित किया, जिन्होंने पर्दे पर एक गायिका सितारा बनने की सच्ची उम्मीदें संजोई थीं. वे सपने पूरी तरह उड़ान नहीं भर सके, और वे अपने गायन या अभिनय में वह ऊँचाइयाँ नहीं छू पाईं, जिनकी वे हकदार थीं. फिर भी, उन्होंने हमें अनेक ऐसे सुरमय क्षण दिए हैं जिन्हें हम हमेशा याद करेंगे और संजोकर रखेंगे.”
Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.
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