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भागदौड़ भरी लाइफ में मेंटल हेल्थ का नया मंत्र: दूसरों से नहीं, खुद से तारीफ की उम्मीद रखें

2025 में खुद से अच्छी बातें बोलना एक बड़ा ट्रेंड बना. यह तनाव कम करने और दिमाग को पॉजिटिव रखने का आसान तरीका है. अपनी जरूरत के हिसाब से ये बातें बोलने से मन शांत रहता है और काम में मन लगता है.

2025 में खुद से अच्छी बातें बोलना एक बड़ा ट्रेंड बना. यह तनाव कम करने और दिमाग को पॉजिटिव रखने का आसान तरीका है. अपनी जरूरत के हिसाब से ये बातें बोलने से मन शांत रहता है और काम में मन लगता है.

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Parmita
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manasik shanti ke liye achhi baaten

आजकल हर तरफ फैली नेगेटिविटी के बीच, थोड़ी सी पॉजिटिविटी बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है. पॉजिटिव बातें एक तरीका है जिससे हमारा दिमाग खुश और पॉज़िटिव सोचने लगता है और हम काम में मन लगा सकते हैं. Photograph: (Canva)

साल 2025 वह साल था जब मानसिक शांति के लिए 'मैं जैसा हूं, सही हूं', 'मैं सुरक्षित हूं' और 'खुद के लिए मेरे पास समय है' जैसी बातें काफी मशहूर हुईं. इस ट्रेंड के पीछे की वजह यहां दी गई है:

आजकल हर तरफ फैली नेगेटिविटी के बीच, थोड़ी सी पॉजिटिविटी बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है. पॉजिटिव बातें (affirmations) एक तरीका है जिससे हमारा दिमाग खुश और पॉज़िटिव सोचने लगता है और हम काम में मन लगा सकते हैं. दूसरों से तारीफ की उम्मीद करने के बजाय खुद को अच्छी बातें बोलना आज के स्ट्रेस भरे दौर में सेल्फ केयर का सबसे अच्छा तरीका है. 'मैं काबिल हूं', 'मुझसे सब प्यार करते हैं', 'मैं हर दिन बेहतर बन रहा हूं' और 'मैं खुश रहता हूं' ये कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें लोग खुद को खुश रखने के लिए दोहराते हैं.

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लेकिन, इन अच्छी बातों को बोलने के ट्रेंड में अब थोड़ा बदलाव आया है. ऐसा इसलिए क्योंकि आजकल लोग बहुत ज़्यादा स्ट्रेस और घबराहट महसूस करने लगे हैं, जो गिरती मेंटल हेल्थ की ओर इशारा करता है.

फोर्टिस हेल्थकेयर की डॉक्टर कामना छिब्बर ने बताया है कि आज के समय में 'मैं जैसा हूं, सही हूं', 'मैं सुरक्षित हूं' और 'मेरे पास चैन की सांस लेने का समय है' जैसी बातों का असली मतलब क्या है.

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'लोग खुद अपनी सेहत का ख्याल रख रहे हैं'

डॉ. छिब्बर का कहना है कि इन अच्छी बातों (affirmations) के बढ़ने का मतलब है कि लोग अब अपने दिमाग को बेहतर ढंग से कंट्रोल करना चाहते हैं, जो खुद का ख्याल रखने के लिए बहुत ज़रूरी है.

उन्होंने कहा कि खुद से ऐसी अच्छी बातें कहने का चलन यह दिखाता है कि लोग अब अपने दिमाग को काबू में रखना चाहते हैं, जो खुद का ख्याल रखने के लिए बहुत जरूरी है. उन्होंने फाइनेंसियल एक्सप्रेस.कॉम को बताया, "इसका मतलब यह नहीं है कि कोई बहुत बड़ी परेशानी है, बल्कि यह दिखाता है कि लोग अपनी खुशी के लिए खुद मेहनत कर रहे हैं. मन को शांत रखने का तरीका सीखना दिमागी सेहत के लिए बहुत जरूरी है. यह अपने दिमाग को संभालने की एक कोशिश है, ताकि हम छोटी-बड़ी बातों पर फालतू परेशान न हों और हर हालात में शांत रहें." उन्होंने आगे कहा, "अब लोग समझ रहे हैं कि दिमागी सुकून कितना कीमती है और इसके लिए हमें खुद ही कदम उठाने होंगे."

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ये अच्छी बातें (Affirmations) कैसे काम करती हैं?

एक रिसर्च में यह पाया गया है कि खुद से अच्छी बातें करने का यह छोटा सा और फ्री का तरीका हमारे मन को खुश रखने में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है. फोर्टिस की डॉक्टर भी इस बात से सहमत हैं. उनका कहना है कि इससे हमारे सोचने का नज़रिया बदल जाता है और हमें जीवन की अच्छी चीज़ें याद आने लगती हैं.

डॉक्टर छिब्बर कहती हैं, "ये अच्छी बातें हमें याद दिलाती हैं कि लाइफ में क्या-क्या अच्छा है. इससे हमारा दिमाग उन पुरानी गलत बातों को छोड़ने लगता है जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं. यह हमारे दिमाग को फिर से सही रास्ते पर लाता है ताकि हम अपनी पूरी काबिलियत के साथ एक अच्छी जिंदगी जी सकें."

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'मेरे पास समय है' बोलने के पीछे का साइंस

आजकल हर किसी को लगता है कि उसके पास समय की बहुत कमी है. इस 'समय की कमी' वाले अहसास की वजह से लोग बहुत ज़्यादा तनाव और घबराहट (anxiety) महसूस करने लगे हैं. ऐसे में 'मेरे पास समय है' वाली अच्छी बात बोलना काफी मशहूर हो रहा है.

जब आप रोज़ खुद से यह बात बोलते हैं, तो इससे आपका दिमाग शांत होता है. यह आपको उन कामों के लिए समय निकालने में मदद करता है जिन्हें करना आप पसंद करते हैं. साथ ही, यह आपको हर वक्त काम के बोझ तले दबने और थककर चूर होने (burnout) से भी बचाता है.

डॉक्टर छिब्बर कहती हैं कि आजकल लोगों में कम समय में बहुत ज्यादा काम करने और बड़े-बड़े सपने पूरे करने की एक अंधी दौड़ मची है. इसकी वजह से उन पर बहुत ज्यादा प्रेशर और फालतू का तनाव पैदा हो जाता है. इस चक्कर में लोग शॉर्टकट लेने की सोचने लगते हैं, जो आगे चलकर बहुत नुकसानदेह साबित हो सकता है.

डॉक्टर ने बताया कि 'मेरे पास समय है' जैसीअच्छी बातें कहने से लोग जिंदगी को बैलेंस करना सीखते हैं. यह हमें याद दिलाता है कि हमारे पास उन कामों के लिए काफी समय है जिनसे हमें खुशी मिलती है और जो हमें सुकून और आराम देते हैं.

कुल मिलाकर, डॉक्टर छिब्बर का कहना है कि हर इंसान अलग होता है इसलिए सबको अपने हिसाब से ये अच्छी बातें चुननी चाहिए.

वो कहती हैं, "मैं लोगों को यही सलाह देती हूं कि वे दूसरों की देखा-देखी न करें, बल्कि यह देखें कि उनकी अपनी जिंदगी में किस चीज की कमी है. फिर वैसी ही बातें सोचें और अपनाएं जो उनकी अपनी लाइफ और जरूरतों के हिसाब से एकदम सही बैठती हों."

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डिसक्लेमर: कोई भी डाइट या फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह जरूर लें. अपनी सेहत या किसी बीमारी से जुड़े सवालों के लिए भी हमेशा अपने डॉक्टर से ही बात करें.

Note: This content has been translated using AI. It has also been reviewed by FE Editors for accuracy.

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