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GST Rate Cut: जीएसटी की दरों में कटौती से महंगाई घटेगी, कंजम्पशन और GDP में होगा इजाफा : मॉर्गन स्टेनली

GST Rate Cut Impact : मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक जीएसटी में कटौती से हेडलाइन इंफ्लेशन (CPI) में FY26 के दौरान 20 से 30 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है.

GST Rate Cut Impact : मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक जीएसटी में कटौती से हेडलाइन इंफ्लेशन (CPI) में FY26 के दौरान 20 से 30 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है.

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FE Hindi Desk
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GST Rate Cut Impact : जीएसटी में कटौती में फेस्टिव सीजन डिमांड को जबरदस्त बूस्ट मिलने की उम्मीद है. (AI Generated Image)

GST Rate Cut Impact : जीएसटी काउंसिल के टैक्स रेट घटाने के ताजा फैसले से आम जनता की जेब को बड़ी राहत मिलने वाली है. खास बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय पर लागू होने जा रहा है जब देश में फेस्टिव सीजन शुरू हो रहा है. ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि जीएसटी दरों में कटौती से सामान सस्ते होंगे, जिससे महंगाई पर असर पड़ेगा. 

मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक इससे “हेडलाइन सीपीआई (CPI) में FY26 के दौरान 20 से 30 बेसिस प्वाइंट तक की कमी आ सकती है और कोर इन्फ्लेशन भी नरम होने के आसार हैं. कीमतों में इस गिरावट से कंज्यूमर्स की डिमांड यानी कंजम्पशन बढ़ेगा. इसका सीधा असर जीडीपी पर भी दिखेगा. इन्वेस्टमेंट बैंक ने इस माहौल में आरबीआई द्वारा इस साल एक और बार रेपो रेट घटाए जाने की उम्मीद भी जाहिर की है.

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दो स्लैब वाले नए GST ढांचे से होगा फायदा

अब तक जीएसटी (GST) चार स्लैब में बंटा हुआ था, लेकिन इसे आसान बनाने के लिए इसे दो दरों में बदल दिया गया है. अब एक स्टैंडर्ड रेट 18 फीसदी और एक मेरिट रेट 5 फीसदी होगा. इसके अलावा, कुछ खास प्रोडक्ट्स जैसे तंबाकू और लग्जरी आइटम्स पर 40 फीसदी की स्पेशल डिमेरिट रेट पहले की तरह जारी रहेगी.

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक, “नई टैक्स दरें फेस्टिव सीजन की शुरुआत के साथ ही लागू हो रही हैं. इससे आम लोगों के लिए सामान खरीदना ज्यादा आसान होगा और खपत में तेजी आएगी.” यानी इस बार फेस्टिव सीजन में भारतीय बाजारों की रौनक बढ़ने जा रही है. 

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रोजमर्रा के सामान और हेल्थ सेक्टर को राहत

नई दरों से सीधे तौर पर रोजमर्रा की चीजों की कीमत पर असर पड़ेगा. हेयर ऑयल, शैम्पू, टूथपेस्ट और शेविंग क्रीम जैसे पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर जीएसटी 18 फीसदी से घटकर अब सिर्फ 5 फीसदी रह गया है. इसी तरह, मक्खन और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स पर टैक्स पहले 12 फीसदी था, जो अब 5 फीसदी कर दिया गया है.

हेल्थकेयर में भी बड़ी राहत दी गई है. हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम अब पूरी तरह से जीएसटी से मुक्त कर दिए गए हैं. इसका फायदा सीधा मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को मिलेगा.

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ऑटो सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स में बिक्री बढ़ने की उम्मीद

वाहनों की कीमत पर भी अब सीधा असर पड़ेगा. छोटी कारों, 350cc से छोटे टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. इसके अलावा कंपनसेशन सेस खत्म होने के कारण दूसरी बड़ी कारों पर भी कुल टैक्स इंपैक्ट कम होगा. साथ ही एयर कंडीशनर और बड़े टीवी सेट्स पर लागू जीएसटी की दरें भी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी गई हैं. इससे ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है. ये वो सेक्टर हैं, जिनमें फेस्टिव सीजन में काफी खरीदारी होती है.

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महंगाई दर और जीडीपी पर क्या होगा असर

मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि टैक्स कटौती से महंगाई पर भी थोड़ा असर पड़ेगा. रिपोर्ट के मुताबिक इससे “हेडलाइन सीपीआई (CPI) में FY26 के दौरान 20 से 30 बेसिस प्वाइंट तक की कमी आ सकती है, जिससे कोर इन्फ्लेशन भी नरम होगा.” मॉर्गन स्टेनली ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान FY26 के लिए 6.7 फीसदी पर बरकरार रखा है. ब्याज दरों के मामले में उसने यह अनुमान जाहिर किया है कि रिजर्व बैंक इस साल एक बार और रेपो रेट कट कर सकता है.

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सरकारी खजाने पर कितना होगा असर

मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक सरकार जीएसटी में कटौती की वजह से सरकारी खजाने पर कुल करीब 48,000 करोड़ रुपये का नेट फिस्कल इंपैक्ट (net fiscal impact) पड़ने की उम्मीद कर रही है, जो जीडीपी (GDP) के करीब 0.13 फीसदी के बराबर होगा. यह आंकड़ा रेवेन्यू में होने वाली 93,000 करोड़ रुपये की संभावित कमी और 40 फीसदी के नए स्लैब की वजह से होने वाले 45,000 करोड़ रुपये के फायदे को एडजस्ट करके निकाला गया है. अनुमान यह भी है कि लंबे समय में बढ़ी हुई खपत से टैक्स कलेक्शन में इजाफा हो सकता है, जिससे सरकार के शुरुआती घाटे की भरपाई हो सकती है.

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