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SBI Research की रिपोर्ट में सोने की कीमतों पर क्या है नजरिया? (Image : Freepik)
SBI Research Report on Gold : सोने की कीमतें इस साल नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं. ऐसे समय में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के इकॉनमिक रिसर्च डिपार्टमेंट ने एक अहम रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि भारत को अब एक विस्तृत और लॉन्ग टर्म गोल्ड पॉलिसी (Gold Policy) की जरूरत है. SBI रिसर्च की इस रिपोर्ट (Coming of (A Turbulent) Age: The Great Global Gold Rush) में सोने की बढ़ती कीमतों, घरेलू सप्लाई पर पड़ रहे दबाव और इसके इंपोर्ट पर निर्भरता जैसे मुद्दों का विस्तार से विश्लेषण किया गया है.
भारत के लिए क्यों जरूरी है गोल्ड पॉलिसी
SBI रिसर्च की बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड बाजार है, जहां सोने को सांस्कृतिक और निवेश दोनों ही रूपों में अहमियत दी जाती है. 2024 में भारत की कुल गोल्ड खपत 802.8 टन रही, जो ग्लोबल डिमांड का लगभग 26% हिस्सा थी. चीन 815.4 टन खपत के साथ पहले स्थान पर रहा. लेकिन भारत में डोमेस्टिक सप्लाई काफी सीमित है. देश की कुल सोने की जरूरत का करीब 86% हिस्सा इंपोर्ट के जरिए पूरा होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए SBI रिसर्च ने सुझाव दिया है कि भारत को एक ऐसी नीति बनानी चाहिए जो देश में गोल्ड के प्रोडक्शन, रीसाइक्लिंग और गोल्ड मॉनेटाइजेशन को बढ़ावा दे सके.
2025 में 50% बढ़ीं सोने की कीमतें
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में सोने की कीमतों में अब तक 50% से ज्यादा उछाल आया है. अक्टूबर में कीमत कुछ समय के लिए 4000 डॉलर प्रति औंस से नीचे गई थी, लेकिन नवंबर में फिर से इसी स्तर के ऊपर पहुंच गई. इसमें जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geo-political Tensions), आर्थिक अनिश्चितता (Economic Uncertainty) और कमजोर अमेरिकी डॉलर (Weak US Dollar) जैसे फैक्टर का बड़ा हाथ रहा है.
Gold Price : आगे कैसा रहेगा कीमतों का रुझान
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने की कीमतें आने वाले महीनों में भी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं और इनमें अस्थिरता (Volatility) भी बनी रहेगी. इसमें बताया गया है कि निवेशक और फंड मैनेजर अब अपने पोर्टफोलियो का 10-20% हिस्सा गोल्ड में रखने की सिफारिश कर रहे हैं, जो पहले करीब 5% होता था. इससे गोल्ड की डिमांड कीमतों के ऊंचे स्तरों पर भी हाई बने रहने की संभावना बढ़ती है.
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तय करें सोना “कमोडिटी” है या “मनी”
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने सोने पर एक राष्ट्रीय नीति लागू की है, जो इसके ट्रेडिंग, स्टोरेज, वैल्यूएशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सभी पहलुओं को शामिल करती है. वहीं भारत में अब तक गोल्ड पॉलिसी सिर्फ शॉर्ट टर्म कदमों तक सीमित रही है, जिनका मकसद लोगों को फिजिकल गोल्ड से दूर करना रहा. रिपोर्ट के मुताबिक अब समय आ गया, जब भारत को भी तय करना होगा कि सोना “कमोडिटी” (Commodity) है या “मनी” (Money) ताकि उसके आधार पर ठोस नीति बनाई जा सके.
सोने की बढ़ती कीमत और रुपया
रिपोर्ट बताती है कि गोल्ड प्राइस और डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट (USD-INR Exchange Rate) के बीच करीब 0.73 का हाई को-रिलेशन है. इसका मतलब ये है कि जब सोने की कीमत बढ़ती है, तो रुपये की वैल्यू कमजोर होती है. हालांकि औसत इंपोर्ट मात्रा के कारण यह प्रभाव सीमित रहता है, लेकिन यह दर्शाता है कि सोने की ऊंची कीमतें देश के विदेशी मुद्रा भंडार और करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) पर सीधा असर डाल सकती हैं.
RBI का बढ़ता गोल्ड रिजर्व
रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पास अब तक करीब 880 टन सोना है, जो उसके कुल विदेशी भंडार का 15.2% हिस्सा है. FY24 में यह हिस्सा 9.1% था. लगातार बढ़ती कीमतों के बीच गोल्ड स्टॉक्स में बढ़ोतरी ने भारत की स्थिति मजबूत की है.
इसी के साथ गोल्ड ईटीएफ (Gold Exchange Traded Funds) में भी जोरदार निवेश देखा गया है. FY25 में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में निवेश 2.7 गुना और FY26 में 2.6 गुना बढ़ा है. सितंबर 2025 तक इनकी नेट एसेट वैल्यू 901.36 अरब रुपये तक पहुंच गयी थी.
गोल्ड पेंशन और मॉनेटाइजेशन स्कीम
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोने को सिर्फ गहने या बचत के तौर पर नहीं, बल्कि एक फाइनेंशियल एसेट (Financial Asset) के रूप में देखने की जरूरत है. इसीलिए फ्यूचर गोल्ड पॉलिसी में सोने के रीसाइक्लिंग और गोल्ड मॉनेटाइजेशन (Gold Monetisation) को महत्व देनी चाहिए. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि भारत को गोल्ड-बैक्ड पेंशन स्कीम (Gold-Backed Pension Scheme) जैसे उपायों पर भी विचार करना चाहिए.
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आगे क्या?
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना अब सिर्फ एक कीमती मेटल नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा “फियर गेज” (Fear Gauge) बन गया है जो ग्लोबल लेवल पर आर्थिक अस्थिरता का संकेत देता है. रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत अब भी ठोस गोल्ड पॉलिसी नहीं लाता, तो यह उसकी मॉनेटरी और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी दोनों के लिए चुनौती साबित हो सकता है.
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